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क्या अमेरिकन ड्रीम से हो रहा मोहभंग? अमेरिकी कॉलेजों में भारतीय छात्रों के आवेदन 15% घटे, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

भारतीय छात्रों की अमेरिका में पढ़ने की चाहत में हाल फिलहाल में कमी आई है। अमेरिकी कॉलेजों में भारतीय छात्रों के आवेदन में 15% की कमी आई है। यह जानकारी एनजीओ कॉमन ऐप के डेटा से मिली है। आइए जानें अमेरिकी संस्थानों में कुल आवेदन बढ़ने के बावजूद यह गिरावट क्यों है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 25, 2026 पर 11:02 AM
क्या अमेरिकन ड्रीम से हो रहा मोहभंग? अमेरिकी कॉलेजों में भारतीय छात्रों के आवेदन 15% घटे, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह
कई अमेरिकी यूनिवर्सिटी अंतरराष्ट्रीय छात्रों से 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौटने की अपील कर रही हैं।

भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में ढेरों छात्र अमेरिका स्थिति दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी या संस्थानों से पढ़ाई का सपना देखते हैं। लेकिन हाल फिलहाल में अमेरिकी संस्थानों से छात्रों का मोहभंग देखने को मिल रहा है। कम से कम भारतीय छात्रों के आवेदन में 15% की कमी देखने को मिल रही है। ये गिरावट इसलिए भी बड़ी हो जाती है, क्योंकि शैक्षिक सत्र 2026-27 में अमेरिकी शैक्षिक संस्थाना में कुल अंडरग्रेजुएट आवेदन की संख्या बढ़ी है।

अमेरिका में 1,100 से अधिक इंस्टीट्यूशन का प्रतिनिधित्व करने वाली गैर लाभकारी संस्था (NGO) कॉमन ऐप के डेटा के मुताबिक, इमिग्रेशन पॉलिसी सख्त होने और स्टूडेंट वीजा को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण अमेरिकी कॉलेजों में भारतीय छात्रों के आवेदन में 15% की गिरावट आई है। इस बीच, कई अमेरिकी यूनिवर्सिटी अंतरराष्ट्रीय छात्रों से 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौटने की अपील कर रही हैं। यहां पारंपरिक "स्टेटस की ड्यूरेशन" व्यवस्था की जगह निश्चित अवधि वीजा स्टे वाले नए नियम लागू होने वाले हैं।

कॉमन ऐप की रिपोर्ट से पता चलता है कि 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए 1 मार्च तक अंतरराष्ट्रीय अंडरग्रेजुएट आवेदन में 10% की गिरावट आई थी। इसने इस गिरावट को अपने डेटा में दर्ज सबसे बड़ी गिरावट बताया, जबकि कुल मिलाकर आवेदन में बढ़ोतरी बनी हुई है। भारत में 15% की गिरावट दर्ज की गई, जो इस बात को देखते हुए काफी है कि यह अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शैक्षिक सत्र 2024-25 के दौरान 3.63 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने अमेरिकी संस्थानों में प्रवेश लिया।

अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी का एक नया नियम है, जो स्टूडेंट और एक्सचेंज वीजा के लिए ट्रेडिशनल "स्टेटस की ड्यूरेशन" सिस्टम को ऑथराइज्ड स्टे के फिक्स्ड पीरियड से बदल देता है। यह नियम 15 सितंबर से लागू होने वाला है। विश्वविद्यालय हर संभव तरीके से छात्रों और स्कॉलर्स को संपर्क कर सूचित कर रहे हैं कि उनके इमिग्रेशन के स्टेटस पर इसका क्या असर होगा।

द हार्वर्ड क्रिमसन के मुताबिक, हार्वर्ड के अंतरराष्ट्रीय कार्यालय ने ऑन-कैंपस कार्यक्रम में प्रवेश लेने वाले F-1 और J-1 छात्रों के साथ-साथ J-1 स्कॉलर्स को सलाह दी है कि नए नियम लागू होने के बाद वे अमेरिका में रहने पर विचार करें। यह अंतर इसलिए जरूरी है क्योंकि जो लोग नियम लागू होने के समय पहले से अमेरिका में हैं, उनके साथ उन लोगों से अलग बर्ताव किया जाएगा जो बाद में देश में दाखिल होते हैं। पीटीआई ने एक यूनिवर्सिटी एडवाइजरी का जिक्र किया है जिसमें कहा गया है कि जो छात्र पहले से अमेरिका में हैं, उनके I-94 रिकॉर्ड पर मौजूदा “D/S” नोटेशन बना रहेगा, जबकि 15 सितंबर से आने वालों को एक फिक्स्ड “एडमिट टिल डेट” मिलेगी।

जो स्टूडेंट्स अभी अमेरिका में हैं, वे अपने शैक्षिक कार्यक्रम के खत्म होने या काम पूरा होने के बाद काम करने की मंजूरी खत्म होने तक, अधिक से अधिक चार साल के समय तक बिना एक्सटेंशन मांगे रह सकते हैं। जो लोग विदेश यात्रा करके 15 सितंबर के बाद लौट रहे हैं, वे इसके बजाय नए फिक्स्ड-टर्म सिस्टम के तहत आ सकते हैं। इन बदलावों से इस बात पर भी असर पड़ सकता है कि स्टूडेंट्स को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका छोड़ने या अपना स्टेटस ठीक करवाने में कितना समय लगेगा।

मौजूदा व्यवस्था के तहत, F-1 छात्रों को आम तौर पर 60 दिन का ग्रेस पीरियड मिलता है, जबकि J-1 भागीदारों को 30 दिन का। नए नियम में F-1 ग्रेस पीरियड को घटाकर 30 दिन किया जाएगा। पीटीआई के मुताबिक, शिकागो यूनिवर्सिटी, जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी, ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी जैसी यूनिवर्सिटीज ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों, स्कॉलर और लोगों को वैकल्पिक प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के बारे में जानकारी दी है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स को 8 सितंबर को क्लास शुरू होने से पहले न्यूयॉर्क लौटने की सलाह दी है, और कहा है कि यह सलाह नए नियम को लागू करने की टाइमलाइन से जुड़ी है।

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