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Board Exam 2026 Stories of Courage: जज्बे से दे रहीं मुश्किलों को मात, जानिए इस साल बोर्ड परीक्षा देने वाली इन बहादुर छात्राओं की कहानी

Board Exam 2026 Stories of Courage: इस साल बोर्ड परीक्षाओं में दो ऐसी कहानियां देखने-सुनने को मिलीं, जो छात्रों को ही नहीं, अभिभावकों और शिक्षकों को भी प्रेरित कर रही हैं। इनमें से एक कहानी हाथरस की मान्या की है और दूसरी है चंडीगढ़ की कनिष्का बिष्ट की। आइए जानें इनके बारे में

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 20, 2026 पर 9:49 PM
Board Exam 2026 Stories of Courage: जज्बे से दे रहीं मुश्किलों को मात, जानिए इस साल बोर्ड परीक्षा देने वाली इन बहादुर छात्राओं की कहानी
देश के कई राज्यों में हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं।

Board Exam 2026 Stories of Courage: देश के कई राज्यों में हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। परीक्षा देने जा रहे छात्र अच्छे नंबर पाने और अपने सपनों के और करीब पहुंचने के लिए खूब मेहनत कर रहे हैं। उनकी मेहनत परीक्षा के बाद जारी होने वाले नतीजों में भी दिखाई देगी। लेकिन इन परीक्षाओं के बीच कुछ ऐसे कहानियां भी देखने और सुनने को मिल रही हैं, जिनसे पूरा देश प्रेरित हो रहा है। इनमें से एक कहानी है चंडीगढ़ की बेटी कनिष्का की, जो लाइफ सपोर्ट सिस्टम के साथ एंबुलेंस से 12वीं कक्षा की परीक्षा देने पहुंची। वहीं, दूसरी कहानी यूपी के हाथरस की बेटी मान्या की है, जिसका एक हादसे में पैर कट गया। इसके बावजूद वो अपने पिता के कंधों पर बैठ कर परीक्षा देने जा रही है।

आईसीयू से एंबुलेंस से परीक्षा देने पहुंची

चंडीगढ़ की 17 साल की छात्रा कनिष्का बिष्ट जन्म से मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से जूझ रही है। 30 जनवरी को कनिष्का की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे 3 फरवरी को निमोनिया होने की पुष्टि हुई। पहले से मौजूद बीमारी और नई परेशानी के बावजूद जीरकपुर की रहने वाली कनिष्का ने अपने बोर्ड परीक्षा देने का फैसला किया। वह शुक्रवार को सीबीएसई की 12वीं कक्षा की फिजिक्स की परीक्षा देने के लिए इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) से सीधे एम्बुलेंस में अपने परीक्षा केंद्र पहुंची।

ऑक्सीजन सिलेंडर और एक मेडिकल टीम की मदद से, कनिष्का को मणि माजरा के सेक्टर 13 में सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल (मॉडर्न कॉम्प्लेक्स) ले जाया गया। उसके पिता, प्रेम बिष्ट ने कहा कि कनिष्का ने हाल ही में जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE) पास किया था और उसने बोर्ड परीक्षा देने का पक्का इरादा कर लिया था। स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन ने कनिष्का के लिए एक अलग, मेडिकल इक्विप्ड कमरे में एग्जाम देने का इंतजाम किया।

हादसे में कटा पैर तो पिता की पीठ पर पहुंची परीक्षा देने

दूसरी तरफ, हाथरस के नौरंगाबाद पूर्वी निवासी प्यारेलाल 18 मार्च को शुरू हुई यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन अपनी बेटी मान्या को पीठ पर बैठाकर आर्य कन्या इंटर कॉलेज तक लेकर पहुंचे। पिता प्यारे लाल ने बताया कि जब मान्या कक्षा 9 में थी, तब एक हादसे में उसकी टांग कट गई। सिकन्दराराऊ के आर्य कन्या इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर ये दृश्य वहां मौजूद हर किसी को भीतर तक झकझोर गया। विद्यालय स्टाफ ने छात्रा को उसकी सीट तक पहुंचाया। बेटी का सहारा बने पिता अपना फर्ज बखूबी निभा रहे हैं। मान्या ने पिता से कहा कि पापा, मेरी टांग नहीं रही तो क्या हुआ, मैं पढ़-लिखकर अपनी मंजिल जरूर हासिल करूंगी। बेटी की इस जिद ने पिता का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

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