CBSE Answer Sheet Row: इस साल जब से सीबीएसई बोर्ड ने 12वीं कक्षा का रिजल्ट जारी किया है, तब से नए-नए खुलासों ने सभी को हैरान कर रखा है। अभी छात्र वेदांत श्रीवास्तव की आंसर शीट का मसला ठंडा होने से पहले एक और छात्रा संजना ने भी ऐसा ही दावा कर सबको चौंका दिया है। उसका कहना है कि बोर्ड ने उसे जो स्कैन आंसर शीट दी है उसमें सिर्फ पहला पेज ही उसका है, बाकी पूरी कॉपी किसी और की लग रही है। संजना के इस मामले पर सीबीएसई बोर्ड ने तुरंत एक्शन लिया। इस मामले में बोर्ड ने छात्रा को ईमेल कर उसकी मूल कॉपी खोजने की जानकारी दी है। साथ ही, केमिस्ट्री में उसके नंबर अपडेट करने का भी आश्वासन दिया है।
सीबीएसई ने संजना को किया ईमेल
इस बीच, संजना नाम की छात्रा ने अपने एक्स हैंडल पर सीबीएसई की ओर से गलती मान लेने का भी पोस्ट किया गया है। इस मामले में सीबीएसई ने एक ईमेल कर छात्रों से अपनी गलती मानी है। सीबीएसई की कोऑर्डिनेशन यूनिट के जॉइंट सेक्रेट्री की तरफ से किए गए इस ईमेल में कहा गया है कि आपकी चिंता वाजिब है और हमने आपकी वास्तविक आंसर शीट खोज ली है। जल्द ही आपकी ओरिजनल केमिस्ट्री आंसर शीट आपको उपलब्ध कराई जाएगी। इसी के साथ केमिस्ट्री में आपको मिले सही अंक भी अपडेट किए जाएंगे।
संजना ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में दावा किया कि उन्होंने सीबीएसई की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के तहत अपनी केमिस्ट्री की स्कैन आंसर शीट मंगाई थी। लेकिन कॉपी देखने के बाद उनकी हैरानी का ठिकाना नहीं रहा। संजना का कहना है कि कॉपी में लिखावट उनकी नहीं है। उन्होंने तुलना के लिए अपनी अंग्रेजी की आंसर शीट भी पोस्ट की है, जिसमें उनकी असली लिखावट दिखाई दे रही है। संजना ने कहा कि उन्हें केमिस्ट्री में 70 में से केवल 11 अंक दिए गए हैं, जबकि उन्हें इससे कहीं ज्यादा नंबर मिलने की उम्मीद थी।
एक्स पर कई छात्रों ने लगाए गलत मूल्यांकन के आरोप
वेदांत के बाद संजना का मामला उजागर होने पर कई अन्य छात्रों ने भी री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। एक छात्र ने दावा किया कि उसने अपनी कॉपी की स्कैन प्रति मंगाई तो उसे पता चला कि अंग्रेजी और हिंदी जैसे विषयों में अपेक्षा से काफी कम अंक दिए गए हैं। छात्र का कहना है कि अंग्रेजी के बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही जवाब देने के बावजूद उसे आधा अंक मिला। इसी तरह गणित विषय में भी कई सवालों पर पूरे अंक नहीं दिए गए। छात्रों का आरोप है कि या तो मूल्यांकन में लापरवाही हुई है या स्कैनिंग और ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी है।