CBSE Board Exam 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए बड़े बदलाव की घोषणा की है। बोर्ड ने कुछ समय पहले 12वीं कक्षा के लिए ऑनलाइन मार्किंग स्कीम (OSM) शुरू करने की घोषणा की थी। इन दोनों व्यवस्थाओं से छात्रों की मूल्यांकन प्रक्रिया सीधेतौर से प्रभावित होने वाली है। बोर्ड इन दोनों बदलावों को 2025-26 के वर्तमान शैक्षिक सत्र से लागू करने जा रहा है। सीबीएसई बोर्ड का ताजा निर्देश बोर्ड परीक्षा के नतीजे आने के बाद नंबरों की दोबारा जांच या वैधता (post result verification) से संबंधित है।
सीबीएसई बोर्ड की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा की आंसर शीट के मूल्यांकन का तरीका बदला है। 2026 से, 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के लिए पूरी तरह से डिजिटल मूल्यांकन पर केंद्रित होगा और बोर्ड परीक्षा की कॉपियों की जांच ऑनलाइन की जाएगा। इस कदम के साथ, रिजल्ट के बाद मार्क्स का वेरिफिकेशन अब जरूरी नहीं होगा।
यह फैसले की जानकारी शुक्रवार को सीबीएसई द्वारा स्कूल टीचर और प्रिंसिपल के लिए आयोजित एक वर्कशॉप के दौरान दी गई। सीबीएसई के एग्जामिनेशन कंट्रोलर संयम भारद्वाज ने कहा, "बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट के बाद नंबरों की वैधता जांच की अब जरूरत नहीं होगी। इससे वेरिफिकेशन के लिए संसाधन की जरूरत कम होगी क्योंकि टोटलिंग में किसी भी तरह की गलती की कोई गुंजाइश नहीं होगी।" उन्होंने आगे कहा, “पुरानी व्यवस्था में, छात्र पूरे नंबरों या गायब नंबरों में अंतर की जांच के लिए वेरिफिकेशन करवाते थे। डिजिटल मूल्यांकन की नई स्कीम में, ऐसी वजहों को शुरू में ही खत्म कर दिया जाएगा।”
नई व्यवस्था के तहत, आंसर शीट को स्कैन करके एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा, जहां परीक्षक उन्हें दूर से ही असेस कर सकते हैं। इस बदलाव से उन आम दिक्कतों को दूर करने की उम्मीद है जिनकी वजह से स्टूडेंट्स रिजल्ट घोषित होने के बाद वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करते थे, खासकर टोटलिंग में गलतियां या बिना चेक किए जवाब।
भारद्वाज ने कहा, “हमने पिछले अनुभवों से सबक का आकलन किया, सिस्टम को रीडिजाइन किया, ड्राई रन किए, गड़बड़ियों की पहचान की, स्टेकहोल्डर का फीडबैक लिया, ग्लोबल टेस्टिंग की और सेफ्टी और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को मजबूत किया।”