CBSE OSM portal data shift: साइबर हमलों से परेशान सीबीएसई ने कोएम्‍प्‍ट से डाटा कंट्रोल, लेकिन आंसर शीट की स्‍कैनिंग यही कंपनी करेगी

CBSE OSM portal data shift: री-इवैल्‍युएशन पोर्टल पर साइबर हमलों से परेशान सीबीएसई बोर्ड ने कोएम्‍प्‍ट कंपनी के सर्वर से सारा डाटा हटाकर अपने खुद के सर्वर पर शिफ्ट कर लिया है। हालांकि, कंपनी अब भी आंसर शीट की स्‍कैनिंग का काम जारी रखेगी

अपडेटेड Jun 06, 2026 पर 5:06 PM
विवादों में घिरी कंपनी ही छात्रों की कॉपियों का मूल्‍यांकन करना जारी रखेगी। AI generated image

CBSE OSM portal data shift: सीबीएसई बोर्ड ने 12वीं कक्षा के अंक सत्‍यापन और पुनर्मूल्‍यांकन पोर्टल को लेकर मचे बवाल के बीच कोएम्‍प्‍ट कंपनी को लेकर बड़ा फैसला किया है। बोर्ड ने इस कंपनी के सर्वर से ऑन स्‍क्रीन मार्किंग (OSM) से संबंधित सारा डाटा हटाने का फैसला किया है। बोर्ड ने यह कदम कई दिनों तक चले साइबर सुरक्षा ऑडिट के बाद लिया है। हालांकि, सर्वर से डाटा हटाने के बावजूद विवादों में घिरी कंपनी ही छात्रों की कॉपियों का मूल्‍यांकन करना जारी रखेगी।

सीबीएसई 12वीं मार्क्स वेरिफि‍केशन और री-इवैल्‍युएशन प्रक्रि‍या के दौरान लगातार साइबर हमले झेल रहे बार्ड के पोर्टल का आईआईटी कानपुर, आईआईटी मद्रास और डीआईसी की टीमों ने 10 दिनों तक कड़ा सुरक्षा ऑडिट किया। लेकिन इसमें इन्‍हें किसी भी तरह के डेटा लीक का सबूत नहीं मिला है और वर्तमान में सीबीएसई का पूरा सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है। बोर्ड ने आंसर शीट की स्कैनिंग के लिए विवादों में घिरी कंपनी COEMPT Eduteck Pvt Ltd को बरकरार रखने का फैसला किया है।

विवादों के बावजूद काम जारी रखेगी कोएम्‍प्‍ट

छात्रों की स्‍कैन आंसर शी में लगातार मिल रही गड़बड़ी की खबरों के बीच बोर्ड ने विवादित कंपनी से आंसर शी की स्‍कैनिंग का काम जारी रखने का फैसला किया है। इस फैसले की जानकारी देते हुए आईआईटी अधिकारी ने इस फैसले का बचाव करते हुए तर्क दिया कि पूरे ऑपरेशन के पैमाने को देखते हुए विवादित पेजों की संख्या बहुत ही कम थी। अधिकारी के मुताबिक, "इस प्रोसेस के तहत लगभग 40 करोड़ पेज स्कैन किए गए थे, जिनमें से केवल 30,000 पेजों में ही दिक्कतें सामने आईं। इसका सीधा मतलब यह है कि हर 10,000 में से महज एक पेज में समस्या थी।"

10 दिनों तक किया गया सुरक्षा ऑडिट

साइबर हमलों की कोशिशों और सुरक्षा में कमियों की खबरों के बाद, सीबीएसई ने ऑन मार्क पोर्टल की जांच की जिम्‍मेदारी आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास की टीमों को सौंपी थी। आईआईटी के अधिकारी ने बताया कि साइबर सिक्योरिटी 10 दिनों तक चली प्रक्रिया में सीबीएसई का रजिस्ट्रेशन पोर्टल और ओएसएम री-इवैल्यूएशन सिस्टम, दोनों शामिल थे। इस ऑडिट में एक "ब्लू टीम" शामिल थी जिसका काम कोड को मजबूत करना था और एक "रेड टीम" थी जिसने कमियों का पता लगाने और सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश की। डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC) ने कोड को मजबूत करने की प्रक्रिया का नेतृत्व किया, वहीं आईआईटी कानपुर ने कमियों की जांच की। कोएम्‍प्‍ट के इंजीनियर इस बदलाव के दौरान शामिल रहे। उन्होंने टेक्निकल टीमों को कोडबेस के हिस्सों को समझने में मदद की, डेटा माइग्रेशन में सहयोग किया और सिक्योरिटी उपाय लागू किए।


डेटा लीक का कोई सबूत नहीं

री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर कई साइबर हमलों के बाद हुई इस सुरक्षा समीक्षा में 3 जून को हुआ 'डिनियल-ऑफ-सर्विस' (DoS) हमला भी शामिल था। यह प्रोसेस एथिकल हैकर निसर्ग द्वारा उजागर की गई कमियों की वजह से भी शुरू की गई थी। आईआईटी अधिकारी ने बताया कि छात्र को ऑडिट की कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं दी गई। उसे अपनी रिसर्च के बारे में बताने के लिए बुलाया गया था और उसके काम की सराहना की गई। अधिकारी ने कहा, सीबीएसई का पूरा सिस्टम अब पूरी तरह सुरक्षित है।

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