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दिल्ली विश्वविद्यालय में 1 साल के PG कोर्स के लिए 5857 सीटें जुड़ीं, जानें 4-साल की डिग्री के बाद सीधे PhD का नियम

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एक साल के पीजी प्रोग्राम में 5857 सीटें जोड़ने या बढ़ाने का फैसला किया है। शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए एक साल के 46 पीजी प्रोग्राम में इन सीटों का इजाफा किया गया है। इस हिसाब से हर पाठ्यक्रम में औसतन 120 सीटें हैं। आइए इसके बारे में और अधिक जानें

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 21, 2026 पर 5:43 PM
दिल्ली विश्वविद्यालय में 1 साल के PG कोर्स के लिए 5857 सीटें जुड़ीं, जानें 4-साल की डिग्री के बाद सीधे PhD का नियम
46 प्रोग्राम में 5,857 सीटों के हिसाब से हर प्रोग्राम में औसतन लगभग 127 सीटें बनती हैं।

यह खबर उन छात्रों के लिए बेहद अहम है, जो दिल्ली विश्वविद्यालय से परास्नातक यानी पोसट ग्रेजुएशन करना चाहते हैं। यूनिवर्सिटी ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के शैक्षिक सत्र के लिए एक साल की अवधि वाले 46 पीजी प्रोग्राम में सीटें बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत यूनिवर्सिटी हर प्रोग्राम में 120 बढ़ाएगा, जिससे कुल 5857 सीटें एक साल के पीजी पाठ्यक्रम में बढ़ेंगीं।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब यूनिवर्सिटी से चार साल के अंडरग्रेजुएट कार्यक्रम से पहला बैच स्नातक पूरा कर निकलने वाला है। यूनिवर्सिटी ने अपने दो साल के पीजी प्रोग्राम में सीटों की मौजूदा संख्या बनाए रखी है, जिससे चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) के तहत स्नातक होने वाले छात्रों को शामिल करने के लिए कुल पीजी इनटेक को असरदार तरीके से बढ़ाया गया है। न्यूज एजेंसी एएनाई की खबर के मुताबिक, डीयू 46 विषयों में एक साल का पीजी प्रोग्राम ऑफर कर रहा है, जिसमें कुल 5,857 सीटें हैं। इसमें रेगुलर मोड में 2,807 सीटें शामिल हैं। 46 प्रोग्राम में 5,857 सीटें हर प्रोग्राम में औसतन लगभग 127 सीटें बनती हैं।

डीयू के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने क्लासरूम और टीचिंग स्टाफ की बढ़ी हुई जरूरत को पूरा करने का इंतजाम किया है। गुप्ता ने कहा, "हम अतिरिक्त टीचर हायर करेंगे। हमने कॉलेजों में पढ़ाने वाले टीचरों के लिए भी इंतजाम किया है कि वे यूनिवर्सिटी में आकर पढ़ाएं। हम उन्हें मानदेय देंगे।" बता दें, एफवाईयूपी को छात्रों को उनकी स्नातक पढ़ाई के दौरान रिसर्च और एंटरप्रेन्योरशिप का ज्यादा अनुभव देने और भारतीय डिग्री को वैश्विक मानक के साथ जोड़ने के मकसद से शुरू किया गया था।

डीयू ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के आधार पर अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क (UGCF) 2022 के तहत 2022-23 शैक्षिक सत्र से एफवाईयूपी शुरू किया था। 2022-23 शैक्षिक सत्र में डीयू में कुल 75,948 छात्रों को प्रवेश मिला। इनमें से, 40,005 स्टूडेंट्स 2025 में तीन साल की स्नातक पढ़ाई पूरी करने के बाद बाहर हो गए, जबकि लगभग 35,943 चौथे साल में आगे बढ़े।

यूनिवर्सिटी के डेटा के मुताबिक, चौथे साल में आगे बढ़ने वाले 35,943 स्टूडेंट्स में से 12,111 ने 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए एक साल के पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में एडमिशन के लिए अप्लाई किया। इसका मतलब है कि चौथे साल में आगे बढ़ने वाले लगभग 33.7% छात्रों ने एक साल के पीजी प्रोग्राम के लिए आवेदन किया। एक साल के पीजी प्रोग्राम में उपलब्ध 5,857 सीटों में से, आवेदकों की संख्या 12,111 थी। इसलिए उपलब्ध सीटें एप्लिकेंट्स की संख्या का लगभग 48.36% हैं।

डीयू का एक साल का पीजी कार्यक्रम भी दूसरे विश्वविद्यालयों की तुलना में काफी बड़ा है। यूनिवर्सिटी ने 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए अपने दो साल के पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में भी उतनी ही सीटें ऑफर करना जारी रखा है, खासकर उन छात्रों के लिए जिन्होंने तीन साल पूरे करने के बाद एफवाईयूपी छोड़ दिया था।

यूनिवर्सिटी ने चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम से पीएचडी प्रवेश के लिए एक सीधा शैक्षिक रास्ता भी बनाया है। यूनिवर्सिटी के ऑर्डिनेंस VI में एक बदलाव के तहत, एफवाईयूपी को 7.5 या उससे ज्यादा सीजीपीए और एससी/एसटी छात्रों के लिए 7.0 या उससे ज्यादा सीजीपीए के साथ पूरा करने वाले छात्र सीधे पीएचडी प्रोग्राम के लिए अप्लाई करने के लायक होंगे।

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