Emergency in NCERT textbook: एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल, भारतीय नदियों के नाम भी शामिल

Emergency in NCERT textbook: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गुरुवार (25 जून) को एनसीईआरटी के उस फैसले का समर्थन किया जिसके तहत कक्षा-9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में आपातकाल के दौर पर एक अध्याय शामिल किया गया है। पार्टी का कहना है कि भारत के संवैधानिक इतिहास के इस 'काले अध्याय' को याद रखना जरूरी है ताकि ऐसा दोबारा कभी न हो

अपडेटेड Jun 25, 2026 पर 4:12 PM
Emergency in NCERT textbook: नई सामाजिक विज्ञान की किताब में 1975-77 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र की बड़ी परीक्षा बताया गया है

Emergency in NCERT textbook: भारत में इमरजेंसी लागू होने के पांच दशक से भी ज्यादा समय बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार क्लास 9 की किताब में इस ऐतिहासिक टॉपिक को शामिल किया है। इसे 'बड़ी चुनौतियों में से एक' के तौर पर पेश किया गया है, क्योंकि उस दौरान ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, इमरजेंसी का जिक्र नई बनी सोशल साइंस की किताब 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' में है।

इसमें भारतीय लोकतंत्र की खूबियों और चुनौतियों पर चर्चा करने वाले चैप्टर में इमरजेंसी को शामिल किया गया है। 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' में 1975-77 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। NCERT के एक अधिकारी ने कंफर्म किया है कि यह पहली बार है जब क्लास 9 की किताब में इमरजेंसी पर कोई सेक्शन जोड़ा गया है।

स्कूल के सिलेबस में बदलाव


स्कूल के सिलेबस में यह एक अहम बदलाव है, क्योंकि हाल ही में देश ने 1975 में इमरजेंसी की घोषणा के 50 साल पूरे किए हैं। इस सेक्शन में लिखा है, "भारत में लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती तब आई जब 1975-77 में इमरजेंसी लागू की गई। 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी की सरकार के प्रति लोगों में असंतोष बढ़ रहा था। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए।"

इसमें आगे कहा गया है, "जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की। इस दौरान, ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और एक्टिविस्टों को अरेस्ट किया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई।"

जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर

किताब में इमरजेंसी के ख़िलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर दिया गया है। किताब के एक हिस्से में लिखा है, "जयप्रकाश नारायण एक राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक थे और जिन्हें 'लोक नायक' के नाम से जाना जाता है। उनके नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, खासकर बिहार और गुजरात में लामबंद किया। 1977 में इमरजेंसी हटा ली गई और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला। सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दिखाया और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया।"

इमरजेंसी वाला यह सेक्शन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर व्यापक चर्चा का हिस्सा है। इमरजेंसी के अलावा, यह किताब लोकतांत्रिक कामकाज के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे कि फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, सार्वजनिक नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रीयता, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है।

'लोकतंत्र और आप'

इस चैप्टर में "लोकतंत्र और आप" नाम का एक नया सेक्शन भी जोड़ा गया है। NCERT का कहना है कि इसे पहली बार इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र क्लासरूम में सीखी गई बातों को एक नागरिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका से जोड़ सकें। इमरजेंसी के अलावा, नई किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी काफी जोर दिया गया है। इसमें भारत में लोकतांत्रिक कामकाज की शुरुआत शुरुआती ऐतिहासिक दौर से ही बताई गई है और आज के शासन-प्रशासन में उनकी अहमियत को भी समझाती है।

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

इस किताब में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर भी एक खास सेक्शन है, जिसमें मीडिया को "लोकतंत्र का चौथा स्तंभ" बताया गया है। लोगों की चिंताओं को उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है। भारत के लोकतांत्रिक सिस्टम के बड़े पैमाने को दिखाने के लिए, किताब में वोटरों की भागीदारी, वोटिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े तथ्य और आंकड़े शामिल किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि 2024 में भारत में 96.8 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड वोटर थे और पूरे देश में फैले वोटिंग सेंटर्स के बड़े नेटवर्क का भी ज़िक्र किया गया है।

यह चैप्टर शासन-प्रशासन में नागरिकों की भागीदारी दिखाने के लिए जमीनी स्तर के लोकतंत्र के उदाहरणों का भी इस्तेमाल करता है, जैसे गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिलाओं के अनुकूल पंचायत। महिलाओं के वोटिंग अधिकारों और स्थानीय निकायों में आरक्षण के लिए भी एक अलग सेक्शन दिया गया है।

भारत की नदियों के नाम भी शामिल

ANI के मुताबिक, NCERT ने अपनी भाषा की टेक्स्टबुक्स का नाम भारत की नदियों के नाम पर रखा है। 'कृष्णा' नाम कृष्णा नदी के नाम पर रखा गया है। हिंदी टेक्स्टबुक का नाम 'गंगा' रखा गया है, इंग्लिश टेक्स्टबुक का नाम 'कावेरी' रखा गया है, और उर्दू टेक्स्टबुक का नाम 'जमुना' रखा गया है। इसी तरह, कन्नड़ टेक्स्टबुक का नाम 'कृष्णा' रखा गया है क्योंकि यह कर्नाटक में बहने वाली मुख्य नदियों में से एक है।

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इस टेक्स्टबुक के चैप्टर 6 में बैलेंस्ड डाइट के बारे में बताया गया है। इसे पेज 63 पर एक अलग हेडिंग, 'बैलेंस्ड डाइट' के तहत भी कवर किया गया है। पेज 63 पर दी गई तस्वीर में वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन दोनों तरह के खाने की चीज़ें शामिल हैं। टेक्स्टबुक में कहीं भी वेजिटेरियनिज़्म के बारे में बताया या उसे सही नहीं ठहराया गया है, न ही नॉन-वेजिटेरियन खाने का विरोध किया गया है।

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