किसी भी कारण से हर साल पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों की मदद के लिए अब सरकार ने कमर कस ली है। शिक्षा मंत्रालय ऐसे छात्रों को ट्रैक करने की योजना बना रहा है, जिन्हें 12वीं कक्षा से पहले किसी कारण से पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। ऐसे बच्चों को ट्रैक कर उन्हें फिर से स्कूलों से जोड़ने के लिए मंत्रालय जल्द ही एक बड़ी मुहिम शुरू करने की तैयार कर रहा है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एनआईओएस (National Institute of Open Schooling) को पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों को सकूल वापस लाने की जिम्मेदारी सौंपी है। फिलहाल इसकी शुरूआत दसवीं व बारहवीं में फेल होने लाखों बच्चों को ट्रैक कर उन्हें स्कूली शिक्षा से जोड़ने से होगी। एनआइओएस या राज्यों के मुक्त विद्यालयों के जरिए इन छात्रों को पढ़ाई पूरी करने में मदद की जाएगी।
एनआईओएस को सौंपी जाएगी फेल छात्रों की सूची
शिक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक वर्ष 2024 में देशभर के सभी बोर्ड में 10वीं और 12वीं कक्षा में लगभग 2.25 करोड़ छात्र शामिल हुए थे। इनमें से लगभग 50 लाख से अधिक बच्चे सफल नहीं हो पाए थे। शिक्षा मंत्रालय ऐसे सभी छात्रों की सूची एनआईओएस या राज्यों के मुक्त विद्यालयों के साथ साझा करेगा। वे इन छात्रों से संपर्क कर उन्हें फिर से पढ़ाई शुरू करने के लिए प्रेरित करेंगे।
समग्र शिक्षा फंड से दी जाएगी फीस
यूडीआईएसई से होगी छात्रों की ट्रैकिंग
छात्रों की ट्रैकिंग यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) के माध्यम से की जाएगी, जो भारत में स्कूली शिक्षा के लिए आधिकारिक राष्ट्रीय डेटाबेस है। मंत्रालय ने यह पहल 10वीं और 12वीं में फेल होने के बाद अधिकांश बच्चे पढ़ाई छोड़ने के आंकड़ों को देखने के बाद शुरू की है। आंकड़ों के अनुसार, देश में आठवीं तक सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 93% है, जो 10वीं में घटकर 70% और 12वीं तक आते-आते 58% रह जाता है। नौवीं से बारहवीं तक देश का कुल जीईआर 68% है।
पीएम श्री स्कूलों के साथ खुलेगा एनआईओएस सेंटर
मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि स्कूली शिक्षा के अंतर्गत सकल नामांकन अनुपात बढ़ाने के लिए प्रत्येक ब्लाक में खोले गए पीएम-श्री स्कूलों के परिसर में एनआइओएस का एक केंद्र भी खोलने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर ही ऐसे बच्चों को ट्रैक कर उन्हें दाखिला दिया जा सके।