International Physics Olympiad: भारत के नौनिहालों ने पूरी दुनिया में एक बार फिर नाम रोशन किया है। इस बार मंच 56वें इंटरनेशनल फिजिक्स ओलंपियाड का था, जहां अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन से भारत के 5 छात्रों ने स्वर्ण पदक झटके। खास बात यह है कि भारत को यह उपलबधि 2018 के बाद मिली है। इस ओलंपियाड प्रतियोगिता में भारत के इन छात्रों ने अपनी बुद्धिमानी का लोहा मनवाया है। इन छात्रों ने अपने जबरदस्त प्रदर्शन से न सिर्फ गोल्ड मेडल झटका, बल्कि अपने देश को मेडल टैली में सबसे ऊपर पहुंचा दिया।
यह एक वैश्विक प्रतियोगिता थी जिसमें 85 देशों के 381 छात्रों ने हिस्सा लिया। यह प्रतियोगिता कोलंबिया में 5 से 12 जुलाई 2026 के बीच आयोजित की गई थी। भारत ने इस बार चीन, रूस, कजाकिस्तान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे दिग्गज देशों के साथ शीर्ष स्थान पर भी कब्जा जमाया है। फिजिक्स ओलंपियाड के मंच पर डंका बजाने का यह भारत के इतिहास में दूसरा मौका है। इससे पहले साल 2018 में भारत ने यह कमाल किया था, जब पूरी टीम के सभी पांचों सदस्य एक साथ गोल्ड मेडल लेकर स्वदेश लौटे थे।
इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा लहराने वाले पांचों छात्र भारत के अलग-अलग शहरों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें मुंबई के श्रेष्ठ सुरैया, पुणे के कनिष्ठ जैन, इंदौर के ऋद्धेश अनंत बेंदले, दिल्ली के ऋषित गर्ग और अहमदाबाद के स्वरित जोशी शामिल हैं। इन छात्रों ने दुनियाभर से आए 85 देशों के 381 दिग्गज छात्रों के बीच अपनी जगह बनाई। प्रतियोगिता में कुल 51 गोल्ड, 80 सिल्वर और 97 ब्रॉन्ज मेडल बांटे गए थे।
5 घंटे की मैराथन प्रतियोगिता
काम आई होमी भाभा सेंटर की ट्रेनिंग
इस जीत के पीछे छात्रों की मेहनत के साथ-साथ उनके मेंटर्स का भी बड़ा हाथ रहा. भारतीय दल की अगुवाई मुंबई के होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन (HBSCE) के अन्वेष मजूमदार और सेंट जेवियर्स कॉलेज की लीना जोशी कर रही थीं। वहीं कोलकाता के IISER से आनंद दासगुप्ता और रत्नागिरी के गोगटे-जोगलेकर कॉलेज की निशा केलकर साइंटिफिक ऑब्जर्वर के रूप में टीम के साथ थे। इन सभी ने मुंबई के होमी भाभा सेंटर में कई दिनों तक बेहद कठिन और स्पेशल ट्रेनिंग ली थी, जिसका नतीजा पूरी दुनिया के सामने है।