रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स (Moody's Ratings) ने इस वित्त वर्ष 2027 में भारत की इकनॉमिक ग्रोथ के अनुमान में कटौती की है। मूडीज ने इस वित्त वर्ष 2027 में भारतीय जीडीपी की ग्रोथ के अनुमान को 6.8% से घटाकर 6% कर दिया है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही लड़ाई से विकास की रफ्तार धीमी होगी और महंगाई का खतरा बढ़ेगा। मूडीज की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी एशिया में चल रही लड़ाई के चलते लंबे समय तक सप्लाई पर असर पड़ा तो गैस की कमी हो सकती है, तेल महंगा हो सकता है और खाद के आयात पर निर्भरता के चलते फूड इंफ्लेशन भी बढ़ सकता है। युद्ध से प्रभावित एशियाई इलाके से देश की जरूरतों का करीब 55% कच्ता तेल और 90% से अधिक एलपीजी की सप्लाई होती है।
महंगाई और रेपो रेट को लेकर ये है अनुमान
मूडीज का कहना है कि महंगाई अभी तो नियंत्रण में है, लेकिन जियो-पॉलिटिकल रिस्क के चलते इसके तेजी से बढ़ने का खतरा बना दिया है। मूडीज का अनुमान है कि कि इस वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई बढ़ने की औसत रफ्तार वित्त वर्ष 2025-26 के 2.4% से बढ़कर 4.8% हो जाएगी। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज का मानना है कि महंगाई का खतरा फिर से बढ़ने और ग्रोथ के मजबूत बने रहने के साथ 2026-27 में रेपो रेट को आरबीआई या तो स्थिर रख सकता है या इसमें धीरे-धीरे बढ़ोतरी करेगा। हालांकि यह इस पर निर्भर करेगा कि जियोपॉलिटिकल टेंशन कब तक रहेगा और इसका तेल और खाने-पीने की चीजों पर कितना असर पड़ता है।
इस कारण सुस्त हो सकती है ग्रोथ की रफ्तार
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही लड़ाई के चलते भारत की आर्थिक सेहत पर भी असर दिख सकता है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च की रिपोर्ट मूडीज ने जिक्र किया है कि निजी खपत में कमी, औद्योगिकी गतिविधियों में सुस्ती, ग्रास फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में कमी, दाम बढ़ने और लागत बढ़ने से भारत की वृद्धि दर प्रभावित होगी। मूडीज का यह भी कहना है कि दूसरे देशों में रहने वाले भारतीय जो पैसा अपने देश में भेजे जाते हैं, उस पर भी पश्चिमी एशिया में चल रही लड़ाई का असर दिख सकता है क्योंकि इस प्रकार का जितना भी पैसा यानी रेमिटेंस आता है, उसका 40% तो खाड़ी देशों से ही आता है।
बाकी रेटिंग एजेंसियों का क्या है अनुमान?
पिछले महीने OECD (ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकनॉमिक कॉरपोरेशन एंड डेवलपमेंट) ने अनुमान लगाया था कि भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2025-26 के 7.6% से घटकर 2026-27 में 6.1% रह जाएगी । इसके अलावा ईवाई की ‘इकॉनमी वॉच’ रिपोर्ट में जिक्र है कि अगर ईरान-अमेरिका लड़ाई वित्त वर्ष 2026-27 तक जारी रहता है, तो भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ रेट करीब एक पर्सेंटेज प्वाइंट घट जाएगी जबकि खुदरा मुद्रास्फीति करीब डेढ़ पर्सेंटेज प्वाइंट्स बढ़ सकती है। घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा का अनुमान है कि 2026-27 में भारत की ग्रोथ रेट घटकर 6.5% रहेगी।