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MPPSC Manoj Pal success story: 12वीं में 50% और 40 प्रतियोगी परीक्षाओं की असफलता भी नहीं तोड़ पाई मनोज का हौसला, आखिर फतह किया एमपीपीएससी

MPPSC Manoj Pal success story: मनोज पाल की कहानी कभी न हार मानने और अपने जज्बे को हर मुश्किल हालात में कायम रखने की है। 12वीं कक्षा में 50% अंक या 40 प्रतियोगी परीक्षाओं की असफलता, मनोज ने हर नाकामी को न सिर्फ हंस कर सहा बल्कि उससे जीत भी पाई। आइए जानें इनकी सक्सेस स्टोरी

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 20, 2026 पर 7:44 PM
MPPSC Manoj Pal success story: 12वीं में 50% और 40 प्रतियोगी परीक्षाओं की असफलता भी नहीं तोड़ पाई मनोज का हौसला, आखिर फतह किया एमपीपीएससी
2024 में मनोज ने मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (MPPSC) का स्टेट सर्विस एग्जाम पास कर लिया।

MPPSC Manoj Pal success story: मध्य प्रदेश में असिस्टेंट डायरेक्टर (फाइनेंस) बनने तक मनोज पाल का सफर ऐसी झकझोर देने वाली कहानी है, जो सिर्फ प्रेरणा नहीं देती। यह कहानी उनके दर्द और अथक परिश्रम को भी बयां करती है। नर्मदापुरम जिले के खपरिया गांव के रहने वाले मनोज ने लगभग 12 साल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। इस दौरान उन्हें बार-बार मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन 2024 वो सुनहरा साल था, जब उन्हें अपनी बरसों की मेहनत का फल मिला, जब उन्होंने मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (MPPSC) का स्टेट सर्विस एग्जाम पास कर लिया। उनके सफर में आर्थिक तंगी, परिवार का दबाव और कई नाकाम कोशिशें शामिल थीं। फिर भी, उन्होंने कभी अपनी किताबों का साथ नहीं छोड़ा।

12वीं कक्षा में 50% से असिस्टेंट डायरेक्ट (वित्त) तक

मनोज ने अपनी स्कूल की पढ़ाई अपने गांव में पूरी की और कक्षा 12 में लगभग 50% अंकों से पास हुए। घर में आर्थिक तंगी की वजह से उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल था। वह कॉलेज के लिए नर्मदापुरम चले गए और सरकारी परीक्षा की तैयारी करने के साथ ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपना गुजारा किया।

कोविड 19 महामारी के दौरान उनके जीवन का सबसे मुश्किल दौर आया, जब हालात की वजह से उनकी आय रुक गई। वह अपने गांव लौट आए और पढ़ाई जारी रखने के लिए मजदूरी करते हुए पैसों की कमी को पूरा किया। बाद में वे इंदौर चले गए और एक कोचिंग सेंटर में काम करते हुए अपनी तैयारी जारी रखी।

40 असफलताओं की लंबी लिस्ट

इन सालों में, मनोज ने लगभग 40 प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, जिनमें पुलिस कांस्टेबल, फॉरेस्ट गार्ड, पटवारी, ऑडिटर और एडमिनिस्ट्रेटर के पद शामिल थे। उन्होंने कई एमपीपीएससी भर्ती के अलावा एसएससी के एमटीएस, सीएचएसएल और सीजीएल परीक्षाएं भी दीं। इनमें से कई परीक्षाओं में उन्हें आंशिक सफलता मिली, लेकिन अंतिम चयन से दूर रहे।

मुश्किल रहा एमपीपीएससी का सफर

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