NEET UG 2026 Counselling Mistakes: नीट यूजी 2026 का री-एग्जाम हो चुका है। इसके नतीजे भी घोषित हो चुके हैं। इस उतार-चढ़ाव भरी प्रक्रिया में सफल परीक्षार्थियों को मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया के अंतिम चरण का इंतजार है। नीट यूजी परीक्षा पास करना इस प्रक्रिया का आधा हिस्सा है। असल चुनौती मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया का काउंसलिंग राउंड होती है। अक्सर देखने को मिलता है कि परीक्षा पास करने के बावजूद कई मेधावी छात्र मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने से चूक जाते हैं। नीट यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए सतर्कता और सही स्ट्रैटेजी की जरूरत होती है। फीस न भरने या किसी ऑप्शन को ठीक से न समझने की छोटी सी लापरवाही आपको नीट यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर कर सकती है। इसलिए नीट यूजी 2026 काउंसलिंग 07 अगस्त के आस-पास शुरू होने से पहले आइए इसमें अमूमन होने वाली आम गलतियों को जान लें और उससे बचने का तरीका भी समझ लें।
चॉइस फिलिंग में जल्दबाजी और ओवर-कॉन्फिडेंस
ये नीट यूजी काउंसलिंग में सबसे बड़ी गलती होती है। कई छात्र सिर्फ चुनिंदा टॉप कॉलेजों का नाम भरकर छोड़ देते हैं। अगर आपके मार्क्स के हिसाब से उन कॉलेजों की कट-ऑफ हाई चली गई तो आप राउंड से बाहर हो जाएंगे। अपनी रैंक का सही आकलन करें और सुरक्षित बैकअप के तौर पर कॉलेजों की लिस्ट तैयार रखें।
लॉक करने से पहले चॉइस का रिव्यू न करना
चॉइस फिल करने के बाद उसे ध्यान से री-चेक करें। कई बार छात्र सीट की प्रेफरेंस सही क्रम में नहीं लगाते हैं। चॉइस लॉक करने के बाद उसमें कोई बदलाव नहीं हो सकता। अगर आपने किसी कम पसंद वाले कॉलेज को ऊपर रख दिया तो हो सकता है कि आपको वही अलॉट कर दिया जाए। इसलिए यह स्टेप बहुत सावधानी से पूरा करें।
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान फर्जी सर्टिफिकेट, गलत कैटेगरी सर्टिफिकेट या डुप्लिकेट डाक्यूमेंट्स देना किसी अपराध से कम नहीं है। ऐसा करने पर न केवल आपका अलॉटमेंट कैंसिल हो जाएगा, बल्कि एंटी-रैगिंग और मेडिकल काउंसिल के सख्त नियमों के तहत 3 से 5 साल तक के लिए बैन भी किया जा सकता है।
फ्री एग्जिट रूल्स को न समझना
नीट यूजी काउंसलिंग के हर राउंड के अपने नियम होते हैं। उदाहरण के लिए, राउंड-1 में आमतौर पर ‘फ्री एग्जिट’ मिलता है, लेकिन राउंड-2 या मॉप-अप (स्ट्रे वैकेंसी) राउंड में अगर सीट अलॉट हो जाती है और आप रिपोर्ट नहीं करते हैं तो सिक्योरिटी मनी जब्त हो सकती है। इसके आगे के राउंड्स से बाहर भी किया जा सकता है।
डेडलाइन और फीस पेमेंट में देरी
नीट यूजी काउंसलिंग पोर्टल पर हर स्टेप की सख्त डेडलाइन होती है। मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या फिर कॉलेज में रिपोर्टिंग का समय- इनमें से किसी भी काम में कुछ घंटों की देरी भी एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन रद्द करवा सकती है।
स्टेट और ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में तालमेल न रखना
15% ऑल इंडिया कोटा और 85% स्टेट कोटा की काउंसलिंग की डेट्स अक्सर आस-पास होती हैं। अगर आप दोनों जगह ट्राई कर रहे हैं तो सभी नियमों को बहुत ध्यान से पढ़ लें। किसी एक जगह सीट फाइनल होने के बाद दूसरी जगह की गाइडलाइंस का पालन न करना आपको कानूनी और तकनीकी उलझन में फंसा सकता है।