Re-NEET 2026 Telegram ban: सोशल मीडिया पर आईआईटी कानपुर डायरेक्टर और सार्थक-निसर्ग में हुई तीखी तकरार, सार्थक ने ‘म्याऊं-म्याऊं’ से समझाया टेलिग्राम का एटिडिंग फीचर

Re-NEET 2026 Telegram ban: माइक्रो मेसेजिंग एप टेलिग्राम पर बैन के बीच सोशल मीडिया पर आईआईटी कानपुर के निदेशक मनींद्र अग्रवाल और सार्थक सिद्धांत-निसर्ग अधिकारी में तीखी बहस चली। दोनों टेक सैवी छात्रों ने आईआईटी निदेशक के सामने खुलकर फैक्ट रखे और बैन का विरोध किया

अपडेटेड Jun 17, 2026 पर 1:29 PM
सार्थक ने अपने एक म्याऊं-म्याऊं मेसेज से समझाने की कोशिश की कि टेलीग्राम कैसे काम करता है।

Re-NEET 2026 Telegram ban: नीट पुन:परीक्षा से पहले सरकार ने हाल ही में माइक्रो मेसेजिंग एप टेलिग्राम बैन लगाने का निर्देश दिया है। 21 जून 2026 को नीट री-एग्जाम से पहले पेपर लीक की अफवाहों और संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए 30 जून तक टेलिग्राम एप के कामकाज को भारत में प्रतिबंधित रखने का फैसला किया गया है। सरकार के इस फैसले को सही ठहराते हुए आईआईटी कानपुर के निदेशक मनींद्र अग्रवाल ने एक्स पर पोस्ट किया। अग्रवाल की पोस्ट पर सीबीएसई ओएसएम पोर्टल से जुड़े खुलासों से चर्चा में निसर्ग अधिकारी और सार्थक सिद्धांत के बीच तीखी बहस चली। दोनों टेक सैवी छात्रों ने आईआईटी निदेशक के सामने खुलकर फैक्ट रखे और बैन का विरोध किया।

सीबीएसई पोर्टल विवाद के दौरान सुर्खियों में आए टीन व्हिसलब्लोअर, सार्थक सिद्धांत और निसर्ग ने टेलीग्राम के बारे में आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर मनिंद्र अग्रवाल के दावों की फैक्ट-चेकिंग करने के साथ ही कुछ तथ्य पेश किए। अग्रवाल ने सरकार की कार्रवाई और एनटीए के बयान का बचाव करते हुए कहा कि टेलीग्राम के मैसेज-एडिटिंग फीचर ने धोखेबाजों को परीक्षा के बाद पुरानी पोस्ट को एडिट करके और उन्हें इस सबूत के तौर पर पेश करके पेपर लीक के नकली सबूत बनाने की अनुमति दी कि प्रश्न पत्र पहले से उपलब्ध थे। लेकिन कई टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल, एंटरप्रेन्योर और डेवलपर्स ने सवाल उठाया कि क्या टेलीग्राम सच में बिना कोई निशान छोड़े एडिट करने की अनुमति देता है।

सार्थक ने अपने एक म्याऊं-म्याऊं मेसेज से जहां यह समझाने की कोशिश की कि टेलीग्राम कैसे काम करता है। वहीं निसर्ग अधिकारी ने भी मेसेज एडिट हिस्ट्री के स्क्रीनशॉट के साथ इस पूरे मामले पर अपनी राय व्यक्त की। बहस तब शुरू हुई जब अग्रवाल ने लिखा कि टेलीग्राम का इस्तेमाल नकली लीक दावे बनाने के लिए किया जा सकता है। डायरेक्टर ने लिखा, "टेलीग्राम चैनल के साथ प्रॉब्लम लीक हुए पेपर को शेयर करना नहीं है, इसे करने के कई और तरीके हैं, बल्कि इसका इस्तेमाल लीक की फेक न्यूज फैलाने के लिए किया जा सकता है जो असली लगती है।" उन्होंने यह भी कहा कि टेलीग्राम किसी को बिना कोई निशान छोड़े फेक लीक करने देता है।

इस पर एंटरप्रेन्योर और डेवलपर निसर्ग ने जवाब दिया। उन्होंने टेलीग्राम पर रोक के असर और इसके पीछे के टेक्निकल कारण, दोनों की बुराई की। इससे पहले निसर्ग को आईआईअी कानपुर में एक रोल ऑफर किया गया था। निसर्ग ने लिखा: "> पेपर लीक को रोक नहीं सकते > आखिर में टेलीग्राम को ब्लॉक कर देते हैं" और कहा कि "टेलीग्राम को पूरी तरह से ब्लॉक करना भी मुमकिन नहीं है, टेलीग्राम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि लोग आसानी से प्रॉक्सी और बचने के दूसरे तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।" निसर्ग ने आईआईटी डायरेक्टर से स्पष्ट किया कि टेलीग्राम में भी सब कुछ दिख सकता है।

उन्होंने टेलीग्राम के ओपन-सोर्स कोडबेस की ओर भी इशारा किया और कहा कि एडिट टाइमस्टैम्प फंक्शनैलिटी पब्लिकली दिखाई देती है और वेरिफाई की जा सकती है। ओएसएम पोर्टल में खामियों का खुलासा करने वाले सार्थक के चर्चा में दखल देने बाद यह बातचीत और वायरल हो गई। सार्थक सिद्धांत ने लिखा, "सिर्फ इसलिए कि एक कम्युनिकेशन मीडियम में गलत जानकारी है, हमने उसे बंद करने का फैसला किया है। ~ IITK डायरेक्टर, क्या व्हाट्सएप में गलत जानकारी नहीं है? क्या भारतीय प्रेस में नहीं है? पूरे टेलीग्राम को बंद करने के पीछे क्या वजह है?" सार्थक ने अपना बात रखते हुए कहा कि गलत जाकारी का एक स्रोत नहीं है। उन्होंने कहा कि हर माध्यम को बंद नहीं किया जा सकता है।

सार्थक ने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया जिसमें एक टेलीग्राम मैसेज "म्याऊं म्याऊं" दिखा, जिसमें एक एडिटेड मार्कर और टाइमस्टैम्प दिख रहा था, जिसे सार्थक ने सबूत के तौर पर पेश किया कि टेलीग्राम में एडिट्स दिखते हैं। अग्रवाल ने यूजर्स से पूछा कि क्या पीडीएफ में बिना बदलाव की तारीख दिखाए उसे बदल सकते हैं। सार्थक ने जवाब दिया, "बदलाव का टाइमस्टैम्प, मान लीजिए पीडीएफ भी, वहीं दिखता है," एक और स्क्रीनशॉट शेयर किया जिसमें "एडिटेड" लेबल दिख रहा था।


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