Sarah Moin ISC Topper: बीमारी ने छीनी देखने, सुनने और बोलने की ताकत, तो सारा मोइन ने हौसले के दम पर हासिल किए 12वीं में 98% से ज्यादा नंबर

Sarah Moin ISC Topper: लखनऊ की सारा मोइन पूरे देश के लिए हौसले की मिसाल बन कर सामने आई हैं। सारा न देख सकती हैं, न सुन सकती हैं और न ही बोल सकती हैं। इसके बावजूद उन्होंने आईएससी परीक्षा में 98.7% नंबर हासिल किए हैं। परिवार और टेक्नोलॉजी की मदद से उन्होंने ये उपलब्धि हासिल की

अपडेटेड May 01, 2026 पर 1:57 PM
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सारा मोइन को लखनऊ की हेलेन केलर कहा जाता है।

Sarah Moin ISC Topper: सारा मोइन को लखनऊ की हेलेन केलर कहा जाता है। वह न देख सकती हैं, न सुन सकती हैं और न बोल सकती हैं। हालांकि, इस वजह को कभी सारा ने अपनी के रास्ते का रोड़ा नहीं बनने दिया। उन्होंने अपने परिवार और टेक्नोलॉजी की मदद से सीआईएससीई द्वारा 30 अप्रैल, 2026, गुरुवार को घोषित आईसीएसई और आईएससी परिणाम में 12वीं कक्षा में 98.7% हासिल कर वो मुकाम पाया, जिसे पाने में बड़े-बड़ों की हालत खराब हो जाती है।

जन्म से दृष्टिबाधित सारा बचपन में सारकॉइडोसिस (Sarcoidosis) नाम की एक दुर्लभ बीमारी का शिकार हो गई थीं। इस बीमारी ने उनसे सुनने और बोलने की क्षमता भी छीन ली। जिस उम्र में बच्चे अपनी बातों से पूरा घर सिर पर उठा लेते हैं, उस उम्र में सारा अपनी मां की उंगली से उनके हाथ पर उकेरे गए शब्दों को समझना सीख रही थीं।

स्पेशल नहीं जनरल स्कूल से सारा ने लिखी सफलता की इबारत

सारा का ये मुकाम इसलिए और भी खास हो जाता है, क्योंकि उन्होंने कामयाबी ये सीढ़ी किसी स्पेशल स्कूल से नहीं जनरल स्कूल से चढ़ी। उनके पिता मोइन अहमद इदरीसी और मां जूली हामिद के सामने सबसे बड़ी चुनौती तब आई जब सारा के पुराने स्कूल ने उन्हें किसी ‘स्पेशल स्कूल’ में भेजने की सलाह दी। लेकिन वे अड़ गए कि उनकी बेटी मेनस्ट्रीम के बच्चों के साथ ही पढ़ेगी। पिता ने बेटी के भविष्य के लिए अपनी सरकारी नौकरी से वीआरएस (VRS) ले लिया। लखनऊ के क्राइस्ट चर्च कॉलेज के प्रिंसिपल ने सारा की प्रतिभा को पहचाना और उसे अपने संस्थान में पढ़ने की अनुमति दी।

सारा की सारथी बनी टेक्नोलॉजी

सारा की राह कठिन थी, लेकिन उनका जज्बा भी उतना ही फौलादी था। यह सच है कि उनके लिए पढ़ाई सामान्य किताबों से मुमकिन नहीं थी। उनके शिक्षक सलमान अली काजी ने उन्हें ‘ऑर्बिट रीडर’ (Orbit Reader) नाम के डिवाइस से पढ़ाना शुरू किया। यह डिवाइस ब्रेल कीबोर्ड की तरह काम करता है। इसे लैपटॉप से भी जोड़ सकते हैं। सारा के लिए हर टेक्स्टबुक को पेज-दर-पेज स्कैन किया गया और वर्ड फाइल्स में बदला गया, जिससे डिवाइस उन्हें ब्रेल में बदल सके और सारा अपनी उंगलियों के टच से उन्हें पढ़ सकें। 10 में 95% लाने वाली सारा ने 12वीं में अपनी मेहनत से खुद का ही रिकॉर्ड तोड़ दिया।


आईएएस बनना चाहती हैं सारा

जियोग्राफी और मास मीडिया जैसे विषयों में 100 में से 100 अंक लाने वाली सारा यूपीएससी की तैयारी करना चाहती हैं। उनकी आंखों में अब सिविल सेवा अधिकारी (IAS) बनने का सपना पल रहा है। प्रशासनिक अधिकारी पर सारा देश की सेवा करना चाहती हैं। वह साबित करना चाहती हैं कि एक दिव्यांग व्यक्ति भी प्रशासन की कमान संभाल सकता है।

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