Sarah Moin ISC Topper: सारा मोइन को लखनऊ की हेलेन केलर कहा जाता है। वह न देख सकती हैं, न सुन सकती हैं और न बोल सकती हैं। हालांकि, इस वजह को कभी सारा ने अपनी के रास्ते का रोड़ा नहीं बनने दिया। उन्होंने अपने परिवार और टेक्नोलॉजी की मदद से सीआईएससीई द्वारा 30 अप्रैल, 2026, गुरुवार को घोषित आईसीएसई और आईएससी परिणाम में 12वीं कक्षा में 98.7% हासिल कर वो मुकाम पाया, जिसे पाने में बड़े-बड़ों की हालत खराब हो जाती है।
जन्म से दृष्टिबाधित सारा बचपन में सारकॉइडोसिस (Sarcoidosis) नाम की एक दुर्लभ बीमारी का शिकार हो गई थीं। इस बीमारी ने उनसे सुनने और बोलने की क्षमता भी छीन ली। जिस उम्र में बच्चे अपनी बातों से पूरा घर सिर पर उठा लेते हैं, उस उम्र में सारा अपनी मां की उंगली से उनके हाथ पर उकेरे गए शब्दों को समझना सीख रही थीं।
स्पेशल नहीं जनरल स्कूल से सारा ने लिखी सफलता की इबारत
सारा का ये मुकाम इसलिए और भी खास हो जाता है, क्योंकि उन्होंने कामयाबी ये सीढ़ी किसी स्पेशल स्कूल से नहीं जनरल स्कूल से चढ़ी। उनके पिता मोइन अहमद इदरीसी और मां जूली हामिद के सामने सबसे बड़ी चुनौती तब आई जब सारा के पुराने स्कूल ने उन्हें किसी ‘स्पेशल स्कूल’ में भेजने की सलाह दी। लेकिन वे अड़ गए कि उनकी बेटी मेनस्ट्रीम के बच्चों के साथ ही पढ़ेगी। पिता ने बेटी के भविष्य के लिए अपनी सरकारी नौकरी से वीआरएस (VRS) ले लिया। लखनऊ के क्राइस्ट चर्च कॉलेज के प्रिंसिपल ने सारा की प्रतिभा को पहचाना और उसे अपने संस्थान में पढ़ने की अनुमति दी।
सारा की सारथी बनी टेक्नोलॉजी
आईएएस बनना चाहती हैं सारा
जियोग्राफी और मास मीडिया जैसे विषयों में 100 में से 100 अंक लाने वाली सारा यूपीएससी की तैयारी करना चाहती हैं। उनकी आंखों में अब सिविल सेवा अधिकारी (IAS) बनने का सपना पल रहा है। प्रशासनिक अधिकारी पर सारा देश की सेवा करना चाहती हैं। वह साबित करना चाहती हैं कि एक दिव्यांग व्यक्ति भी प्रशासन की कमान संभाल सकता है।