UPSC Success Story: पिता सड़कों पर बेचते थे पकौड़े और बेटी IAS बनकर निकली, ऐसी है भरतपुर की दीपेश कुमारी की कहानी

Deepesh Kumari IAS success story: सफलता सुविधाओं की मोहताज नहीं होती है। ये तो बस मेहनत और लगन से ही पाई जा सकती है। ऐसी ही कहानी है भरतपुर की दीपेश कुमारी। इनके पिता सड़कों पर पकौड़े और स्नैक्स बेचते थे, लेकिन दीपेश अपनी मेहनत और लगन से आईएएस बनकर निकलीं।

अपडेटेड Sep 02, 2025 पर 12:26 PM
दीपेश ने यूपीएससी की परीक्षा ऑल इंडिया 93वां रैंक के साथ पास की।

UPSC Success Story: पिता सड़कों पर बेचते थे पकौड़े और बेटी IAS बनकर निकली। ये सच्ची और प्रेरित करने वाली कहानी है दीपेश कुमारी की। राजस्थान के भरतपुर की दीपेश की जिंदगी कभी आसान नहीं रही। एक कमरे में सात जनों का परिवार 25 साल तक रहता रहा। उनके पिता गोविंद कुमार सड़कों पर पकौड़े और स्नैक्स बेचते रहे। लेकिन दीपेश ने इन मुश्किलों को कभी अपने रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया। सीमित संसाधनों और पहाड़ सी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई को हमेशा सबसे ऊपर रखा। इसी का नतीजा है कि वो संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा AIR 93 रैंक के साथ पास करने में सफल रहीं।

शुरुआत से पूरी लगन से पढ़ाई करने वाली दीपेश ने भरतपुर के शिशु आदर्श विद्या मंदिर से 10वीं कक्षा 98% और 12वीं कक्षा 89% अंकों के साथ पास की। उनका सफर यहीं पर नहीं रुका और जोधपुर के एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज से उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया और उसके बाद एमटेक करने के लिए आईआईटी बॉम्बे चली गईं। एक साल तक प्राइवेट कंपनी में नौकरी की। इसके बाद आईएएस बनने का अपना सपना पूरा करने के लिए दीपेश ने नौकरी छोड़ दी और जुट गईं यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने में।

2020 में पहली कोशिश में नाकाम रहने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह दिल्ली आ गईं और अपनी बचत की मदद से तैयारी करती रहीं। 2021 में उनकी मेहनत रंग लाई और दीपेश ने पूरे देश में 93वीं स्थान पाकर यूपीएससी की परीक्षा पास की। उन्होंने ईडब्लूएस श्रेणी में चौथा स्थान प्राप्त किया। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बनीं और उन्हें झारखंड कैडर दिया गया।

दीपेश की सफलता ने उनके सभी भाई बहनों को भी प्रेरित किया और उनका एक भाई एम्स गुवाहाटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है, वहीं एक बहन सफदरजंग हॉस्पिटल में डॉक्टर है। एक अन्य भाई लातूर में पढ़ाई कर रही है। अपने आईएएस बनने के सफर पर दीपेश कहती हैं कि उनके पिता का समर्पण उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया, ‘जब भी मैं थक जाती थी, उनके संघर्ष ने मुझे ताकत दी।’ वह भारत भर के उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद महान उपलब्धियां हासिल करने की आकांक्षा रखते हैं।

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