गोपाल खेमका, अजीत कुमार, रमाकांत यादव, विक्रम झा, जितेंद्र कुमार महतो, सुशीला देवी और सुरेंद्र केवट, इनमें से ज्यादातर नाम शायद आपने न सुने हों, लेकिन बिहार में ये नाम राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गए हैं और वो भी इस साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले। ये वे लोग हैं, जो पिछले 10 दिनों में बिहार में मारे गए हैं, जिससे विपक्ष नीतीश कुमार के शासन में बिगड़ता कानून-व्यवस्था के जरिए लालू यादव के कार्यकाल (1990-2005) को जंगलराज कहे जाने का बचाव कर रहा है।
