Get App

बिहार में मतदाताओं के नाम काटने का मामला, ड्राफ्ट लिस्ट में किसका नाम कटा और क्या SIR के तहत नाम हटाए जा सकते हैं?

NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण और नेहा राठी ने पिछले हफ्ते तत्काल सुनवाई के लिए आवेदन का मौखिक रूप से मेंशन किया था। चुनाव आयोग ने 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पब्लिश करके वोटर लिस्ट के SIR का पहला फेज पूरा कर लिया

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 11, 2025 पर 8:20 PM
बिहार में मतदाताओं के नाम काटने का मामला, ड्राफ्ट लिस्ट में किसका नाम कटा और क्या SIR के तहत नाम हटाए जा सकते हैं?
बिहार में मतदाताओं के नाम काटने का मामला, ड्राफ्ट लिस्ट में किसका नहीं नाम और क्या SIR के तहत नाम हटाए जा सकते हैं?

चुनावी राज्य बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाने के आरोपों का सामना कर रहे चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किए गए लगभग 65 लाख नामों की अलग लिस्ट तैयार करने या जारी करने का उस पर कोई कानूनी दायित्व नहीं है। यह दलील मंगलवार को शीर्ष अदालत में उस आवेदन पर विस्तृत जवाब सुनने से पहले आई, जिसमें एक अगस्त को प्रकाशित बिहार वोटर लिस्ट ड्राफ्ट से हटाए गए 65 लाख मतदाताओं में से हर एक की डिटेल और कारण मांगे गए थे। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 7.24 करोड़ मतदाताओं को एनरोल किया गया था।

NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण और नेहा राठी ने पिछले हफ्ते तत्काल सुनवाई के लिए आवेदन का मौखिक रूप से मेंशन किया था।

चुनाव आयोग ने 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पब्लिश करके वोटर लिस्ट के SIR का पहला फेज पूरा कर लिया। 30 सितंबर को फाइनल लिस्ट जारी करने की तैयारी में चुनाव अधिकारी फॉर्मों की जांच कर रहे हैं और दावों व आपत्तियों पर पूछताछ कर रहे हैं।

वहीं सर्वोच्च न्यायालय विपक्षी दलों और सिविल सोसायटी ग्रुप की ओर से SIR प्रक्रिया पर दायर आपत्तियों पर सुनवाई कर रहा है, जिसकी अगली सुनवाई 12 अगस्त को होनी है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें