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Bihar SIR Row: बिहार में जारी वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन पर SC का रोक से इनकार, आधार और वोटर आईडी स्वीकार करने को कहा

Bihar Voter List Row: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि आप आधार कार्ड और वोटर आईडी को SIR के दस्तावेज के रूप में विचार कीजिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार और मतदाता पहचान पत्र को सामान्य तौर पर प्रामाणिक माना जाता है। ऐसे दस्तावेजों में जालसाजी से हर मामले की परिस्थितियों के आधार पर निपटा जा सकता है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jul 28, 2025 पर 2:14 PM
Bihar SIR Row: बिहार में जारी वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन पर SC का रोक से इनकार, आधार और वोटर आईडी स्वीकार करने को कहा
Bihar Voter List Row: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार और मतदाता पहचान पत्र को सामान्य तौर पर प्रामाणिक माना जाता है

Bihar Voter List Row: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में वोटर लिस्ट के लिए जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा है कि वह मामले पर अंतिम फैसला करेगा। शीर्ष अदालत अब निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार में कराए जा रहे वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं पर 29 जुलाई को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) से उसके पहले के आदेश का अनुपालन करते हुए बिहार SIR के लिए आधार और मतदाता पहचान पत्र स्वीकार करना जारी रखने को कहा है

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि आप आधार कार्ड और वोटर आईडी को SIR के दस्तावेज के रूप में विचार कीजिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार और मतदाता पहचान पत्र को सामान्य तौर पर प्रामाणिक माना जाता हैऐसे दस्तावेजों में जालसाजी से हर मामले की परिस्थितियों के आधार पर निपटा जा सकता हैजस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की, "पृथ्वी पर कोई भी दस्तावेज़ जाली हो सकता है" पीठ ने फिर पूछा, "आप आधार और मतदाता पहचान पत्र को क्यों स्वीकार नहीं करते?"

चुनाव आयोग ने जवाब दिया, "हम कह रहे हैं कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है... लेकिन वे पहचान के प्रमाण के रूप में आधार दाखिल कर सकते हैंहमारे फॉर्म में लिखा है कि अपना आधार नंबर दें" जब आगे ज़ोर दिया गया, तो चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया, "हमारे फॉर्म में आधार का ज़िक्र है"

निर्वाचन आयोग ने रविवार को कहा कि बिहार में प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची का मसौदा आखिरी वोटर लिस्ट नहीं है। आयोग ने कहा कि पात्र मतदाताओं को शामिल करने और अपात्रों को बाहर करने के लिए एक महीने का समय उपलब्ध होगा। मसौदा सूची एक अगस्त को तथा अंतिम सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी। आयोग ने कहा कि बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के एक महीने तक चले पहले चरण के समापन के बाद 7.24 करोड़ या 91.69 प्रतिशत मतदाताओं से गणना फार्म प्राप्त हो गए हैं।

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