भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक दौर वह था जब रोमांस और पारिवारिक ड्रामा बॉक्स ऑफिस पर राज करते थे। लेकिन पिछले कुछ समय में, खासकर महामारी के बाद, दर्शकों के मिजाज में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां एक तरफ 'धुरंधर 2: द रिवेंज' जैसी एक्शन-थ्रिलर फिल्में 1000 करोड़ का आंकड़ा पार कर इतिहास रच रही हैं, वहीं दूसरी ओर 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' जैसी सफलताओं के बावजूद रोमांटिक-कॉमेडी (Rom-Coms) फिल्में दर्शकों के लिए तरस रही हैं।
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? ट्रेड एक्सपर्ट्स और फिल्म समीक्षकों ने इसके पीछे कई चौंकाने वाले कारण बताए हैं।
ओटीटी (OTT) का बढ़ता प्रभाव और दर्शकों की बदलती पसंद
एक अन्य ट्रेड एक्सपर्ट अक्षय राठी का तर्क है कि आज की ज्यादातर रॉम-कॉम फिल्में थिएटर के लिए उपयुक्त नहीं लगतीं। उनके अनुसार, इन फिल्मों में कुछ भी ऐसा 'यूनिक' नहीं होता जो दर्शकों को घर की सुख-सुविधा छोड़कर सिनेमाघर तक खींच लाए। राठी कहते हैं, "एक्शन, थ्रिलर, हॉरर और ऐतिहासिक ड्रामा एक ऐसा 'इमर्सिव' अनुभव देते हैं जिसे बड़े पर्दे पर ही महसूस किया जा सकता है। इसके विपरीत, आजकल की रोमांटिक फिल्मों का संगीत भी 'जिंगल्स' जैसा लगने लगा है। जब तक संगीत और फिल्मांकन में भव्यता नहीं होगी, दर्शक सिनेमाघरों का रुख नहीं करेंगे।"
कंटेंट का अभाव और भविष्य की उम्मीदें
हाल के दिनों में 'परम सुंदरी' और 'सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी' जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ बनाने की कोशिश की, लेकिन वे वैसी सफलता हासिल नहीं कर पाईं। एक्सपर्ट्स इसे 'कंटेंट की कमी' मानते हैं। हालांकि, जानकारों को उम्मीद है कि आने वाली फिल्में जैसे शाहिद कपूर और कृति सेनन की 'कॉकटेल 2' और 'गिन्नी वेड्स सनी 2' इस ट्रेंड को बदल सकती हैं। अगर इन फिल्मों में शानदार संगीत और बेहतरीन कहानी का मिश्रण होगा, तो दर्शक जरूर वापस आएंगे।
ट्रेड एक्सपर्ट्स का स्पष्ट मानना है कि अब सिर्फ 'स्टार पावर' से फिल्में नहीं चलतीं। दर्शक अब पहले से कहीं ज्यादा समझदार हो गए हैं। अगर कंटेंट में दम नहीं है और फिल्म बड़े पर्दे के लायक नहीं है, तो लोग पैसा खर्च करना पसंद नहीं करते। बॉलीवुड को अब अपनी रोमांटिक कहानियों को एक नए और भव्य अंदाज में पेश करने की जरूरत है, ताकि सिनेमाघरों में फिर से तालियों और सीटियों की गूंज सुनाई दे सके।