बॉलीवुड में जब भी कोई ब्लॉकबस्टर फिल्म बनती है, तो पर्दे पर दिखने वाली सफलता के पीछे सालों की मेहनत और कई अनसुने संघर्ष छिपे होते हैं। रणवीर सिंह स्टारर फिल्म 'धुरंधर' के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। हाल ही में मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि इस फिल्म की स्टार कास्ट को फाइनल करने में उन्हें पूरे 2 साल का समय लगा और इस दौरान उनके और निर्देशक आदित्य धर के बीच कई बार तीखी बहस भी हुई।
कास्टिंग डायरेक्टर और डायरेक्टर के बीच की 'तकरार'
धुरंधर जैसी बड़े पैमाने की फिल्म के लिए सही कलाकारों का चुनाव करना कोई आसान काम नहीं था। मुकेश छाबड़ा ने बताया कि आदित्य धर अपने विजन को लेकर बेहद स्पष्ट और सख्त थे। उन्होंने कहा, "आदित्य को हर किरदार में एक खास गहराई चाहिए थी। कई बार ऐसा हुआ कि मैंने किसी अभिनेता का नाम सुझाया और आदित्य ने उसे सिरे से खारिज कर दिया। हमारे बीच कास्टिंग को लेकर काफी झगड़े भी हुए, लेकिन वह सब फिल्म की बेहतरी के लिए था।"
2 साल का लंबा इंतजार और कड़ी मेहनत
आमतौर पर फिल्मों की कास्टिंग कुछ महीनों में पूरी हो जाती है, लेकिन 'धुरंधर' के लिए यह प्रक्रिया दो साल तक खिंची। मुकेश छाबड़ा ने बताया कि उन्हें न केवल मुख्य कलाकारों, बल्कि छोटे-छोटे किरदारों के लिए भी सैकड़ों ऑडिशन लेने पड़े। आदित्य धर चाहते थे कि फिल्म का हर चेहरा असली और कहानी के माहौल में फिट बैठे। विशेष रूप से विलेन और सहायक भूमिकाओं के लिए ऐसे कलाकारों की तलाश थी जो रणवीर सिंह के दमदार व्यक्तित्व को कड़ी टक्कर दे सकें।
रणवीर सिंह और पावरपैक स्टार कास्ट
फिल्म में रणवीर सिंह के अलावा संजय दत्त, आर. माधवन, अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल जैसे दिग्गजों को एक साथ लाना किसी चुनौती से कम नहीं था। मुकेश छाबड़ा ने खुलासा किया कि इन बड़े नामों को एक ही स्क्रिप्ट के लिए राजी करना और उनके किरदारों के बीच संतुलन बनाना उनकी टीम के लिए सबसे कठिन काम था। लेकिन आज जब फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 900 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है, तो मुकेश और आदित्य की वह 2 साल की 'जंग' सफल साबित होती दिख रही है।
आदित्य धर का विजन और सफलता
'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' के बाद आदित्य धर से उम्मीदें काफी ज्यादा थीं। मुकेश छाबड़ा ने प्रशंसा करते हुए कहा कि आदित्य एक ऐसे निर्देशक हैं जो गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं करते। 'धुरंधर' की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर कास्टिंग सही हो, तो आधी जंग वहीं जीत ली जाती है।
आज 'धुरंधर' न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी धूम मचा रही है, और इसका श्रेय पर्दे के पीछे की उस टीम को जाता है जिसने हार न मानते हुए 2 साल तक सर्वश्रेष्ठ की तलाश जारी रखी।