R Madhavan: भाषा विवाद पर आर माधवन की दो टूक, बोले-चाहे जानता हूं या नहीं लेकिन...

R Madhavan: आर माधवन ने हाल में ही भाषा विवाद पर बात करते हुए अपनी राय रखी है। एक्टर ने कहा कि उन्होंने भारत के अलग-अलग राज्यों और संस्कृतियों में रहकर बहुत कुछ महसूस किया है, लेकिन भाषा कभी उनकी जिंदगी या काम में रुकावट नहीं बनी है।

अपडेटेड Jul 13, 2025 पर 4:20 PM
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R Madhavan: एक्टर आर माधवन इस वक्त अपनी अपकमिंग फिल्म 'आप जैसा कोई' को लेकर चर्चा में हैं। इसमें एक्टर के साथ फातिमा सना शेख नजर आ रही हैं। फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर 11 जुलाई को रिलीज हो चुकी है। इस बीच हिंदी-मराठी भाषा को लेकर चल रहे विवाद पर उन्होंने रिएक्ट किया है।

आर माधवन ने हाल में ही भाषा विवाद पर बात करते हुए अपनी राय रखी है। एक्टर ने कहा कि उन्होंने भारत के अलग-अलग राज्यों और संस्कृतियों में रहकर बहुत कुछ महसूस किया है, लेकिन भाषा कभी उनकी जिंदगी या काम में रुकावट नहीं बनी है। जब उनसे मुंबई में चल रहे भाषा के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें कभी भी भाषा की वजह से किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है।

बातचीत में माधवन बोले 'नहीं, मुझे कभी भाषा की वजह से परेशानी नहीं हुई। मैं तमिल में बाता करता हूं, हिंदी में भी बात करता हूं। मैंने कोल्हापुर में भी पढ़ाई की है और मराठी भी आती है। इसलिए मुझे कभी भाषा की वजह से कोई परेशानी नहीं हुई, चाहे मैं भाषा जानता हूं या नहीं।'


हाल ही में, फिल्म 'सन ऑफ सरदार 2' के ट्रेलर लॉन्च पर अजय देवगन से भी हिंदी-मराठी भाषा विवाद को लेकर सवाल किया गया था, तो उन्होंने कहा था कि आता माझी सटकली।' माधवन और अजय के अलावा, सिंगर उदित नारायण ने भी इस विवाद पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा कि हमें हर क्षेत्र की भाषा और संस्कृति को मान देना चाहिए। उदित नारायण ने कहा था, 'हम महाराष्ट्र में रहते हैं और यही मेरी कर्मभूमि है, इसलिए यहां की भाषा आनी चाहिए। साथ ही, हमारे देश की सभी भाषाओं को सम्मान मिलना चाहिए।

बता दें कि विवाद तब शरु हुआ जब महाराष्ट्र सरकार ने अपने सरकारी प्राइमरी स्कूलों में मराठी और इंग्लिश के साथ-साथ हिंदी को तीसरी भाषा के तौर पर पढ़ाने ता निर्देश दिया था। यह कदम देश की तीन-भाषा नीति के तहत लिया था, जिसका मकसद बच्चों को स्कूल में तीन भाषाएं सिखाना था। लेकिन इस मुद्दे का राजनीतिकरण ऐसा हुआ कि जब शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने इससे मराठी अस्मिता को खतरा बता दिया।

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