बॉलीवुड की टाइमलेस ब्यूटी और 70-80 के दशक की आइकॉन जीनत अमान ने इंस्टाग्राम पर एक गहरी चिंतनशील पोस्ट शेयर कर इंडस्ट्री के पुराने रोमांटिक ट्रोप्स पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपनी ही फिल्मों दोस्ताना (1980) और तीसरी आंख (1982) के सीन दोबारा देखते हुए कबूल किया कि बॉलीवुड ने जुनून और पीछा करने को प्यार का नाम दे दिया। 74 साल की उम्र में भी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली ज़ीनत ने कहा, "हमारी फिल्में असली, हेल्दी लव के बजाय ऑब्सेशन और लिमरेंस को ग्लोरिफाई करती रहीं।"
जीनत ने बताया कि पुरानी फिल्में दोबारा देखना उनके लिए अनप्रेडिक्टेबल है कभी खुशी, कभी गुस्सा। दोस्ताना में अमिताभ बच्चन के किरदार द्वारा ईव-टीजिंग और स्लट-शेमिंग वाला सीन उन्हें अब "इरिटेटिंग" लगता है। वहीं तीसरी आंख में धर्मेंद्र के साथ उनका रोल जहां वो आक्रामक रूप से पीछा करती हैं जेंडर फ्लिप का उदाहरण है। उन्होंने लिखा, "बैन्टर और शरारत कोर्टशिप के अच्छे टूल्स हैं, लेकिन हमारी इंडस्ट्री ने इन्हें एक्सट्रीम ले लिया। मैं खुद इस गलत रोमांस आइडिया को फैलाने में शामिल रही, जो पूरे भारत में एक्सपोर्ट हो गया।" यह आत्म-मंथन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।
जीनत ने साफ शब्दों में चेतावनी दी, "रिलेशनशिप्स में कंसेंट नॉन-नेगोशिएबल है, रिस्पेक्ट दोनों तरफ से होना चाहिए। मैंने यह कठिन रास्ते से सीखा।" उनके पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी जेन Z ने सपोर्ट किया, तो कुछ ने पुरानी फिल्मों को कंट्रास्ट बताया। दोस्ताना में इंस्पेक्टर विजय का पीछा करना "जेंटलमैनली" लगता था, लेकिन आज क्रिटिसिज्म का शिकार। जीनत ने पहले भी जेंडर पॉलिटिक्स पर बोला, जैसे द रॉयल्स नेटफ्लिक्स सीरीज में काम करने पर कहा।
यह स्टेटमेंट बॉलीवुड को आईना दिखाता है, जहां स्टॉकिंग को हीरोइज्म बनाया जाता रहा। मेकर्स अब हेल्दी रिलेशनशिप्स दिखाने को प्रोत्साहित हो रहे। जीनत का यह "टू-बिट एफर्ट" बदलाव की शुरुआत हो सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सिनेमा समाज का आईना होता है और अगर फिल्मों में गलत व्यवहार को ग्लोरिफाई किया जाएगा तो उसका असर दर्शकों पर पड़ेगा। ज़ीनत चाहती हैं कि आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ रिश्तों और बराबरी पर आधारित रोमांस दिखाया जाए।
उनकी इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई लोग उनकी बात से सहमत हैं और कह रहे हैं कि इंडस्ट्री को अब ‘टॉक्सिक रोमांस’ से बाहर निकलना चाहिए। वहीं कुछ लोग मानते हैं कि यह सिर्फ मनोरंजन है और दर्शक असल ज़िंदगी में फर्क समझते हैं।
ज़ीनत अमान का यह बयान एक बार फिर साबित करता है कि वह सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि समाज की सोच को बदलने वाली आवाज़ भी हैं।