फिल्म- भूत बांग्ला
फिल्म- भूत बांग्ला
रेटिंग-3
निर्देशक- प्रियदर्शन
कलाकार- अक्षय कुमार, असरानी, तब्बू, वामिका गब्बी, परेश रावल, राजपाल यादव, जिशु सेनगुप्ता, मिथिला पालकर
Bhooth Bangla Review: जाने माने निर्देशक प्रियदर्शन 14 सालों के बाद 'भूत बंगला' से अक्षय कुमार के साथ धमाल मचाने को कमबैक कर चुके हैं। फिल्म ने सिनेमाहॉल में दस्तक दे दी है। इस हॉरर कॉमेडी को लेकर सिने लवर्स में जबरदस्त क्रेज दिख रहा है। भूत बंगला को आज से सिनेमाघरों में दर्शकों का मनोरंजन करेगी।
अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की सालों पुरानी कॉमेडी का क्रेज आज भी लोगों के सिर चढ़कर बोलता हैं। भागम भाग (2006) की उलझन हो या भूल भुलैया का हॉरर...दोनों की हर फिर का स्वाद दर्शकों को खट्टा-मीठा लगा है। अब एक्शन फिल्मों के ट्रेंड के बीच एक बार फिर से दोनों दर्शकों के गुदगुदाने आ गए हैं।
फिल्म की कहानी
भूत बंगला की कहानी अर्जुन (अक्षय कुमार) और उसकी बहन (मिथिला) के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो लंदन में रहते हैं। मिथिला को अचानक अपने दादाजी की बड़ी प्रॉपर्टी और महल विरासत में मिलता है। इसके बाद अर्जुन तय करता है कि अपनी बहन की शादी के लिए वह इसी महल को सजाएगा और पहुंच जाता है भारत के मंगलपुर गांव में। लेकिन कहानियों के अनुसार, उस गांव में किसी की शादी नहीं सदियों से नहीं हुई है। इसके पीछे वधूसुर का श्राप है। वह दुल्हनों को चुरा ले जाता है। इसके बाद ही शुरू होती है मेन कहानी, जिसे देखने के लिए आपको सिनेमाहॉल पहुंचना होगा।
इस फिल्म की कहानी आपको जानी पहचानी तो लगेगी, जिसको कही न कही हम पहले भी देख चुके हैं। इसलिए जरूरी ये है कि आप कितना हंसते और कितना डरते हैं। भूत बंगला इंटरवल से पहले पूरी तरह से पुरानी यादों से भरी नजर आएगी। प्रियदर्शन के सभी सीन पुराने दिन याद दिलाएगी। दरअसल, चोमू महल समेत लोकेशन लगभग वही हैं, जो भूल भुलैया में नजर आ चुकी हैं। दिवाकर मणि ने गांव के माहौल को खूबसूरती से कैद किया है। इसके अलावा, बेहतरीन विज़ुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया गया है, जो फिल्म के लिए वाकई बहुत फायदेमंद साबित हुए हैं।
कही-कही निराश करती है फिल्म
अफसोस की बात है कि खूबियों के साथ-साथ फिल्म में कमियां भी उतनी ही मौजूद हैं। प्रियदर्शन अपने बनाए इस यूनिवर्स में इतना खो जाते हैं कि कई किरदार बीच में गायब हो जाते हैं, फिर अचानक से सामने आ जाते जाते हैं। साथ ही यह भी समझ नहीं आता कि फिल्म को खत्म करने की शुरुआत कहां से करें। फिल्म इंटरवल की कहानी पर अधिक फोकस है। दिलचस्प भी है। लेकिन फिल्म की कमियां आपको थोड़ा सा फिल्म से न जुड़ पाने के लिए मजबूद कर देती हैं। थोड़ी सी एडिटिंग और लगभग 10 मिनट की काट छांट से यह और भी मजेदार हो सकती थी।
म्यूजिक
प्रीतम का म्यूजिक फिल्म में औसत दर्जे का है। सबसे अच्छा गाना - राम जी आके भला करेंगे। वहीं और गाने यादगार नहीं है। लेकिन रॉनी राफेल का बैकग्राउंड स्कोर वाकई दिल जीत लेने वाला है।
एक्टिंग
एक्टिंग की बात करें तो अक्षय कुमार की ईमानदारी और कॉमेडी बेमिसाल है। उन्होंने 'भूत बंगला' में इसे बखूबी निभाया है।पिछले एक साल में ही उन्होंने जिस तरह की बहुमुखी प्रतिभा दिखाई है, वह वाकई तारीफ काबिल है। इस बार भी उन्होंने अपने फिर वहीं पुराने अंदाज से दिल जीत लिया है।
बड़े पर्दे पर अपनी आखिरी उपस्थिति में असरानी को एक दमदार भूमिका मिली है। इस दिवंगत दिग्गज अभिनेता ने इसे इतनी सहजता से निभाया है कि दर्शकों को इमोशनल कर दिया हैं। प्रियदर्शन की हर फिल्म में नजर आने वाले राजपाल यादव फिजिकल कॉमेडी के उस्ताद हैं। 'भूत बंगला' में भी वे दर्शकों को खूब हंसाएंगे। वामिका गब्बी की स्क्रीन पर मौजूदगी खूबसूरत है, लेकिन उनके पास करने को ज्यादा है नहीं। ऐसा ही तब्बू के साथ भी है, जो ज्यादातर बेखबर नजर आती हैं। अक्षय के पिता के रूप में जिस्सू सेनगुप्ता ने दिल जीता है।
कैसी है फिल्म
कुल मिलाकर, भूत बंगला प्रियदर्शन की सबसे शानदर फिल्मों में से एक नहीं है, लेकिन फिर भी यह आपको पसंद आएगी। एक ऐसी फिल्म जिसमें हंसी और निराशा दोनों हैं, यह पुरानी यादों को ताज़ा करती है। अक्षय कुमार की बेमिसाल कॉमेडी और एक ऐसी दुनिया जो जितनी रंगीन है उतनी ही डरावनी भी है आपको थोड़ा इंप्रेस करेगी। यह फिल्म भले ही क्लासिक न बन पाए, लेकिन जब तक चलती है मनोरंजन करती है।
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