मिर्जापुर वेब सीरीज के फैंस को वो सीन आज भी याद है, जहां गुड्डू भइया (अली फजल) अपने दुश्मन शुक्ला को मारने के बाद उसे पूरी हिंदी वर्णमाला सुनाते हैं। 'अ से अनार, आ से आग...' – ये डायलॉग इतना पावरफुल था कि सीरीज का हाइलाइट बन गया। लेकिन क्या आप जानते हैं, ये सीन शूट ही नहीं होने वाला था?
मेकर्स ने कैंसिल कर दिया शॉट
शूटिंग के दौरान दिन ढलने लगा था। लाइटिंग कम हो गई थी, और डायरेक्टर ने फैसला सुना दिया – ये सीन कैंसिल। अली फजल ने हाल ही में मैशेबल इंडिया को दिए इंटरव्यू में इस किस्से को साझा किया। उन्होंने बताया, "शॉट लेने से ठीक पहले हमें बोल दिया गया कि रोशनी कम हो रही है, टाइम नहीं बचा। लेकिन किस्मत से मैंने उस वक्त पूरी वर्णमाला याद कर ली थी।" अली को हिंदी अल्फाबेट्स याद करने में पहले ही देर हो चुकी थी, जिसकी वजह से शूटिंग लेट हो गई। मेकर्स ने सोचा कि अलग-अलग एंगल से शूट करने में ज्यादा समय लगेगा, इसलिए इसे टाल दिया।
अली ने हार नहीं मानी। उन्होंने टीम पर जोर दिया, "यार, एक बार करके देख लो। अगर हो गया तो ठीक, वरना बाद में देखेंगे।" उनकी ये जिद रंग लाई और सिंगल टेक में सीन पूरा हो गया। अली ने कहा, "मेकर्स को लगा टाइम लगेगा, लेकिन किस्मत से एक ही शॉट में निकल गया।" ये मोमेंट गुड्डू के किरदार को अमर बनाने वाला साबित हुआ। फैंस आज भी इसे मिर्जापुर के सबसे यादगार सीन में गिनते हैं, जो बदले की आग और क्रूरता को बखूबी दर्शाता है।
अली फजल ने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा कि एक अभिनेता के लिए किरदार को जीना सिर्फ एक्टिंग तक सीमित नहीं होता। कई बार उसे कहानी की आत्मा को बचाने के लिए भी खड़ा होना पड़ता है। उन्होंने बताया कि मिर्जापुर की सफलता में हर कलाकार और तकनीकी टीम का योगदान है, लेकिन कुछ फैसले ऐसे होते हैं जो शो को नई ऊंचाई देते हैं। मिर्जापुर ने अली फजल को गुड्डू भइया के रूप में स्टार बना दिया। अब सीरीज के बाद 'मिर्जापुर: द फिल्म' पर काम चल रहा है, जिसका फर्स्ट लुक हाल ही रिलीज हुआ। अली ने खुद सोशल मीडिया पर इसका टीजर शेयर किया था।