बॉलीवुड के बेबाक निर्देशक अनुराग कश्यप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपने जीवन के सबसे कठिन दौर का दर्द बयां किया। नेटफ्लिक्स द्वारा रद्द किए गए महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'मैक्सिमम सिटी' के सदमे ने उन्हें गहरे अवसाद में धकेल दिया, जिसके चलते उन्हें दो बार हार्ट अटैक तक आया। उन्होंने इसे गर्भपात जैसी पीड़ा के समान बताया।
'मैक्सिमम सिटी' सुकेतु मेहता की मशहूर किताब पर आधारित थी, जिसे अनुराग 2009 से विकसित कर रहे थे। प्री-प्रोडक्शन स्टेज पर पहुंचते ही नेटफ्लिक्स ने देश के राजनीतिक माहौल का हवाला देकर अचानक पीछे हट लिया। अनुराग ने कहा, "यह मेरा सबसे ईमानदार और बेस्ट काम था। इतनी मेहनत के बाद 1.5 साल की चुप्पी ने तोड़ दिया।" इस झटके से वे डिप्रेशन में चले गए, शराब की भारी लत लग गई और स्वास्थ्य बिगड़ गया। उन्होंने स्वीकार किया कि दुख इतना गहरा था कि उन्हें इसका अहसास ही नहीं हुआ, जब तक थेरपी में न गए।
अनुराग ने बताया कि इस दौरान वे रिहैब तीन बार गए। शराब ने उनकी जिंदगी पर कब्जा जमा लिया था, और हार्ट अटैक ने जान लेने की कोशिश की। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर भी उन्होंने निराशा जताई, "ये क्रांति लाने वाले थे, लेकिन टूल बनकर रह गए।" जावेद अख्तर के साथ 'तांडव' विवाद के बाद कई प्रोजेक्ट्स प्रभावित हुए, और 'मैक्सिमम सिटी' भी उसी का शिकार बना। अनुराग का मानना है कि या तो स्क्रिप्ट संवेदनशील थी या वे खुद उस समय विवादित।
हालांकि, इस मुश्किल समय में उनके साथी फिल्मकार ज़ोया अख्तर ने उन्हें फिर से काम पर लौटने के लिए प्रेरित किया। अनुराग ने स्वीकार किया कि दोस्तों और परिवार के सहयोग ने उन्हें धीरे-धीरे इस अंधेरे दौर से बाहर निकाला।
अनुराग कश्यप, जो अपनी फिल्मों ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘ब्लैक फ्राइडे’ और हालिया फिल्म ‘केनेडी’ के लिए जाने जाते हैं, हमेशा से बेबाक और प्रयोगधर्मी सिनेमा के लिए मशहूर रहे हैं। लेकिन इस घटना ने यह दिखा दिया कि रचनात्मक असफलताएं कलाकारों के निजी जीवन पर कितना गहरा असर डाल सकती हैं।
इस खुलासे ने इंडस्ट्री में हलचल मचा दी। फैंस उनके हौसले की तारीफ कर रहे हैं। 'कैनेडी' जैसी फिल्मों से वापसी करने वाले अनुराग अब नई शुरुआत पर हैं। जोया अख्तर जैसे दोस्तों का साथ उनकी ताकत बना। क्या यह दर्द उनकी आने वाली कहानियों को नई गहराई देगा? अनुराग की जिंदगी साबित करती है कि संघर्ष ही सच्ची कला का आधार है।