Priyadarshan: 'अभिमान में अमिताभ बच्चन से भी बेहतर थे असरानी', प्रियदर्शन ने दिग्गज अभिनेता के हुनर को किया सलाम

Priyadarshan: निर्देशक प्रियदर्शन ने दिग्गज अभिनेता असरानी की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक 'संपूर्ण अभिनेता' बताया और कहा कि फिल्म 'अभिमान' में वे कई जगह अमिताभ बच्चन से भी बेहतर थे। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि इंडस्ट्री ने असरानी की बहुमुखी प्रतिभा को केवल कॉमेडी तक ही सीमित रखा।

अपडेटेड Mar 27, 2026 पर 10:17 PM
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बॉलीवुड में जब भी कॉमेडी और बेहतरीन टाइमिंग की बात होती है, तो असरानी का नाम सबसे ऊपर आता है। लेकिन क्या हम उन्हें सिर्फ एक 'कॉमेडियन' मानकर उनके कद को छोटा कर देते हैं? मशहूर निर्देशक प्रियदर्शन का तो यही मानना है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान प्रियदर्शन ने असरानी की कलाकारी पर ऐसी बात कही है, जिसने पूरी इंडस्ट्री में नई चर्चा छेड़ दी है।

"अमिताभ से भी आगे निकल गए थे असरानी"

प्रियदर्शन, जिन्होंने 'हेरा फेरी' और 'हंगामा' जैसी फिल्मों में असरानी के साथ काम किया है, ने 1973 की क्लासिक फिल्म 'अभिमान' का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस फिल्म में कई दृश्य ऐसे थे जहाँ असरानी ने सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को भी पीछे छोड़ दिया था।

प्रियदर्शन के अनुसार, "अभिमान में एक दोस्त की भूमिका निभाते हुए असरानी ने जो सहजता और गहराई दिखाई, वह काबिल-ए-तारीफ थी। कुछ भावुक दृश्यों में तो वे अमिताभ बच्चन से भी बेहतर नजर आए। वे केवल एक कॉमेडियन नहीं, बल्कि एक संपूर्ण अभिनेता हैं।"


कॉमेडी के टैग में दब गया असली हुनर?

प्रियदर्शन ने इस बात पर दुख जताया कि भारतीय सिनेमा ने अक्सर बहुमुखी प्रतिभा वाले कलाकारों को एक खास 'खांचे' में बांध दिया। उन्होंने तर्क दिया कि असरानी जैसे कलाकार हर तरह की भूमिका निभाने में सक्षम थे, लेकिन इंडस्ट्री ने उन्हें ज्यादातर कॉमेडी तक ही सीमित रखा।

* अभिनय की बारीकियां: प्रियदर्शन ने बताया कि असरानी की सबसे बड़ी ताकत उनकी आंखों का अभिनय और संवाद अदायगी है।

* हृषिकेश मुखर्जी का प्रभाव: असरानी अक्सर ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों का हिस्सा रहे, जहां उन्हें अपनी अभिनय क्षमता दिखाने का भरपूर मौका मिला।

असरानी: 'शोले' के जेलर से 'मालामाल वीकली' के चोखेलाल तक

80 के दशक के 'अंग्रेजों के जमाने के जेलर' वाले आइकॉनिक किरदार से लेकर आज की फिल्मों तक, असरानी ने हर पीढ़ी का मनोरंजन किया है। प्रियदर्शन का मानना है कि नई पीढ़ी के निर्देशकों को उनसे सीखना चाहिए कि कैसे बिना लाउड हुए भी स्क्रीन पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई जाती है। असरानी ने खुद कई बार साक्षात्कारों में कहा है कि उन्हें गंभीर भूमिकाएं पसंद हैं, लेकिन दर्शकों ने उन्हें हंसते-हंसाते हुए इतना प्यार दिया कि वे उसी राह पर चल पड़े। प्रियदर्शन की यह टिप्पणी उनके इसी अनछुए पहलू को उजागर करती है।

सोशल मीडिया पर फैंस की प्रतिक्रिया

जैसे ही प्रियदर्शन का यह बयान सामने आया, फैंस ने भी सहमती जताई। कई सिनेमा प्रेमियों का कहना है कि 'नमक हराम' और 'अभिमान' जैसी फिल्मों में असरानी का अभिनय वाकई विश्व स्तरीय था। लोगों का मानना है कि उन्हें वह सम्मान और पुरस्कार नहीं मिले, जिसके वे वास्तव में हकदार थे।

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