Assi Review: अदालत के कटघरे में इंसाफ की जंग, तापसी पन्नू की फिल्म जो दर्द और सवाल दोनों छोड़ जाती है

Assi Review: अनुभव सिन्हा निर्देशित फिल्म ‘अस्सी’ हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है और इसे लेकर दर्शकों और समीक्षकों की प्रतिक्रियाएं काफी तीखी रही हैं। तापसी पन्नू और कनी कुसरुति स्टारर यह फिल्म एक कोर्टरूम ड्रामा है, जो यौन हिंसा और न्याय व्यवस्था की जटिलताओं को सामने लाती है।

अपडेटेड Feb 20, 2026 पर 4:48 PM
Story continues below Advertisement

फिल्‍म रिव्‍यू: अस्‍सी

निर्देशक : अनुभव सिन्‍हा

प्रमुख कलाकार : तापसी पन्‍नू, मोहम्मद जीशान अय्यूब, कनि कुश्रुति, कुमुद मिश्रा, रेवती

रेटिंग: 3

 


अनुभव सिन्हा की नई फिल्म 'अस्सी' रेप कल्चर और न्याय व्यवस्था की पोल खोलती एक ऐसी कोर्टरूम ड्रामा है, जो दर्शकों के दिल दिमाग पर भारी पड़ती है। तापसी पन्नू और कनी कुश्रुति की दमदार अदाकारी थिएटर्स में छा गई। फिल्म एक गैंग रेप सर्वाइवर की जूझन को बयां करती है, जो देखते ही आपको झकझोर देगी, लेकिन कुछ कमजोर कड़ियां इसे परफेक्ट होने से रोकती हैं। ये फिल्म समाज के काले सच को आईना दिखाती है, जहां इंसाफ की राह में तमाम रुकावटें खड़ी हो जाती हैं।

कहानी की शुरुआत दिल्ली की एक स्कूल टीचर परीमा (कुश्रुति) से होती है, जो एक चलती SUV में बेरहमी से गैंग रेप का शिकार बनाई जाती है। अपराधियों द्वारा रेलवे ट्रैक पर फेंक दी जाती वो जिंदा बच जाती है, लेकिन उसके जख्म जिंदगी भर के लिए रह जाते हैं। तापसी पन्नू ने रावी का किरदार निभाया है, एक साहसी वकील जो परीमा का केस लड़ती है। फिल्म कोर्ट की गलियारों में घूमती है, जहां अमीर और प्रभावशाली आरोपी साक्ष्य मिटाने, गवाह खरीदने और सिस्टम को अपने पक्ष में मोड़ने में जुटे रहते हैं। परीमा का पति विनय (मोहम्मद जीशान अय्यूब) चुपचाप साथ खड़ा रहता है, लेकिन ट्रॉमा की मार पूरे परिवार पर पड़ती है।

फिल्म का असली दम कनी कुसरुती की परफॉर्मेंस में है। रेप सर्वाइवर के रूप में वो साइलेंट स्ट्रेंथ दिखाती हैं - आंखों में दर्द, शरीर में सिहरन, और मन में जंग। तापसी का गुस्सा और जिद भी प्रभावी है, खासकर क्लाइमेक्स के कोर्ट सीन में एक्ट्रेस मने दमदार एक्टिंग दिखाई। लेकिन फिल्म ट्रिगरिंग सीन्स से भरी है ग्राफिक रेप सीन, ब्लैक इंक अटैक, और हर 20 मिनट में रेड स्क्रीन पर रेप स्टैट्स। ये सच दिखाने के लिए जरूरी हैं, लेकिन कई बार ओवरवेल्मिंग हो जाते हैं। सबप्लॉट्स जैसे हिट-एंड-रन स्टोरी और फैमिली डायनामिक्स डिस्ट्रैक्टिंग लगते हैं। डायलॉग्स शार्प हैं, लेकिन फाइनल आर्ग्यूमेंट थोड़ा मैकेनिकल सा लगता है।

अनुभव सिन्हा का ये काम 'मुल्क' और 'आर्टिकल 15' की याद दिलाता है। समाज सुधार पर फोकस, लेकिन इमोशनल ब्रेकडाउन ज्यादा हो गया। बॉलीवुड हंगामा और इंडिया टुडे ने इसे हार्ड-हिटिंग बताया और 4 स्टार दिए। रेप सर्वाइवर के फैमिली इम्पैक्ट, मैरिटल रेप और 'बॉयज लॉकर रूम' टाइप बातचीत को छुआ गया है। फिल्म कहती है - इंसाफ टलना ही इंसाफ मरना है। मल्टीप्लेक्सेस में चल सकती है, लेकिन फैमिली ऑडियंस के लिए नहीं है। तापसी-कनी की जोड़ी कमाल की है, जो फिल्म को देखने लायक बनाती है।

तापसी पन्नू ने अपने किरदार में मजबूती और संवेदनशीलता दोनों को बखूबी निभाया है। वहीं, कनी कुसरुति का अभिनय भी बेहद प्रभावशाली है। कोर्टरूम सीक्वेंस में दोनों अभिनेत्रियों की परफॉर्मेंस फिल्म को दमदार बनाती है। लेकिन समीक्षकों का मानना है कि फिल्म का नैरेटिव कई जगह बिखरा हुआ लगता है और यह अपनी पूरी ताकत से दर्शकों को बांध नहीं पाती।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।