बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के नाती और श्वेता बच्चन-नंदा के बेटे अगस्त्य नंदा इन दिनों अपनी फिल्म इक्कीस को लेकर सुर्खियों में हैं। लेकिन फिल्मों से ज्यादा चर्चा उनके बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने साफ कहा कि वे अपने नाना अमिताभ बच्चन की विरासत को आगे बढ़ाने का दबाव नहीं लेते। अगस्त्य का कहना है कि उनका सरनेम ‘नंदा’ है और वे अपने पिता निखिल नंदा की पहचान को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
परिवार के दबाव से परे अपनी राह
अगस्त्य नंदा ने श्रीराम राघवन की फिल्म 'इक्कीस' के जरिए 1 जनवरी 2026 को सिल्वर स्क्रीन पर कदम रखा। अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन के बाद बच्चन खानदान की तीसरी पीढ़ी के तौर पर वे चर्चा में हैं। लेकिन IMDb पर डायरेक्टर श्रीराम राघवन और को-स्टार सिमर भाटिया के साथ बातचीत में अगस्त्य ने साफ कहा, 'मैं उस दबाव को बिल्कुल नहीं लेता क्योंकि वो मेरी विरासत नहीं है। मेरा सरनेम नंदा है, इसलिए मैं सबसे पहले अपने पिता का बेटा हूं। मेरा फोकस उन्हें गर्व महसूस कराने पर है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि परिवार के दूसरे एक्टर्स का काम उन्हें पसंद है, लेकिन खुद को उनके जैसा बनाने की कोशिश बेकार है। यह बयान उनकी परिपक्व सोच को दर्शाता है, जो नेपोटिज्म बहस को नई दिशा दे रहा है।
अगस्त्य के पिता निखिल नंदा राज कपूर के पोते हैं, जबकि मां श्वेता नंदा अमिताभ की बेटी। ऐसे में वे दो दिग्गज फिल्मी खानदानों से जुड़े हैं। लेकिन अगस्त्य का जोर अपनी पहचान बनाने पर है। 'इक्कीस' में उनके अभिनय की सराहना हो रही है, और अमिताभ ने KBC में उन्हें खुलकर सपोर्ट किया। नाना-पोते की केमिस्ट्री ने दर्शकों को भावुक कर दिया। अगस्त्य का यह रवैया दिखाता है कि नई पीढ़ी पुरानी विरासत को बोझ नहीं, बल्कि प्रेरणा मानती है। वे साबित करना चाहते हैं कि टैलेंट ही असली हथियार है।
दबाव से दूर, आत्मविश्वास से भरे
बच्चन परिवार से जुड़े होने के कारण अगस्त्य पर हमेशा तुलना का दबाव रहता है। लेकिन उन्होंने साफ किया कि वे इस दबाव को महसूस नहीं करते। उनका कहना है कि वे अपने काम और मेहनत से ही अपनी जगह बनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने में विश्वास रखते हैं, न कि बच्चन परिवार की पहचान को।
भविष्य की उम्मीदें और प्रेरणा
अगस्त्य का डेब्यू बॉलीवुड के लिए नया अध्याय खोल सकता है। वे आर्चीज जैसी वेब सीरीज से पहले ही चर्चा में थे। उनका यह बयान युवा कलाकारों के लिए मिसाल है कि परिवार की शोहरत से ऊपर उठकर अपनी कहानी लिखी जा सकती है। अमिताभ बच्चन ने भी ब्लॉग में उनके काम की तारीफ की, कहते हुए कि हर शॉट में परफेक्शन है। अगस्त्य साबित कर रहे हैं कि सरनेम से ज्यादा महत्वाकांक्षा मायने रखती है।