Chand Mera Dil Review: आज के मार्डन रिश्तों की सच्चाई दिखाती है लक्ष्य-अनन्या पांडे की 'चांद मेरा दिल'

Chand Mera Dil Review: 'चांद मेरा दिल' में अनन्या पांडे और लक्ष्य की दमदार केमिस्ट्री और कहानी ने लोगों का दिल जीत लिया है। फिल्म आपको मॉर्डन रिश्तों की सच्चाई से रूबरू कराएगी।

अपडेटेड May 22, 2026 पर 10:49 AM
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'चांद मेरा दिल' दिल की कहानी आपको आज की जनरेशन के रिश्तों का सच बताती है। यह समझती है कि 'हमेशा खुश रहने' के बाद की लाइफ स्ट्रगल से भरी हो सकती है।

फिल्म- चांद मेरा दिल

रेटिंग-3/5

कलाकार-अनन्या पांडे, लक्ष्य और परेश पाहुजा और अन्य

निर्देशक-विवेक सोनी

Chand Mera Dil Review: बॉलीवुड में लव स्टोरीज का बोलबाला किसी से छिपा नहीं है। लड़का-लड़की मिलते हैं, प्यार की चिंगारी भड़कती है। कभी-कभी परिवार के गु्स्से का सामना भी करते हैं। वहीं आज के दौर में फिल्मों में लीड एक्टर का गुस्सेल रूप ही विलेन का रोल करता है। वहीं लास्ट में हैप्पी एंडिंग हो भी सकती है और नहीं भी। कुछ ऐसा ही अनन्या पांडे और लक्ष्य स्टारर 'चांद मेरा दिल' की कहानी हैं।


'चांद मेरा दिल' दिल की कहानी आपको आज की जनरेशन के रिश्तों का सच बताती है। यह समझती है कि 'हमेशा खुश रहने' के बाद की लाइफ स्ट्रगल से भरी हो सकती है। विवेक सोनी द्वारा निर्देशित यह फिल्म इस पहलू को खूबसूरती से दर्शाती है कि सबकुछ अच्छा-अच्छा नहीं होता है। यह समय, अहंकार, थकान, माफी, सॉफ्टनेस, छोटी-छोटी चोटों और बड़े दर्द के बारे में बिना किसी रोमांटिक अंदाज के बात करती है।

हैदराबाद में फिल्माई गई यह फिल्म इंजीनियरिंग स्टूडेंट चांदनी और आरव की लाइफ पर बेस्ड है। आरव को चांदनी से लव एट अ फर्स्ट साइट होता है। मंच उसके फ्यूजन क्लासिकल डांस देखकर आरव उसके प्यार में पागल हो जाता है। शर्मीला और इट्रोवर्ट आरव, चांदनी के करीब आने के लिए उससे ट्विनिंग करते हुए कपड़ों को पहनकर क्लास में आने लगता है।

जब वह चांदनी पर गिवअप करने लगता है, तभी उसे एहसास होता है कि चांदनी ने उसे कभी अनदेखा नहीं किया था। अगले कुछ वीक एक क्लासिक बॉलीवुड लव स्टोरी की तरह बीतते हैं। लंबी बाइक राइड, चोरी-छिपे नज़रें मिलाना, हॉस्टल के कमरे में रोमांस, रोमांटिक व्हाट्सएप मैसेज, बचपन के ट्रॉमा पर दिल को छू लेने वाली बातचीत और यहां तक कि व्यस्त सड़क के बीचोंबीच रोमांस करने को लेकर जेल की हवा खाना।

फिर, एक दिन, चांदनी अचानक अपनी डेट कैंसिल कर देती है। उस दिन जो कुछ होता है, वह उनके रिश्ते की दिशा हमेशा के लिए बदल देता है। परिवार दोनों के बीच दखल देते हैं। नौकरी की अपॉर्चुनिटी हाथ से निकल जाती हैं। साथ में की गईं बातों की जगह बढ़ती दूरी ले लेती है, जब तक कि दोनों अलग नहीं हो जाते। कई बार माफी मांगना और दिल से किए गए इकरार का कोई असर नहीं होता। आत्मसम्मान प्यार से ज़्यादा जरूरी हो जाता है, खासकर चांदनी के लिए।

शुरुआती सीन में से एक में, आरव चांदनी से कहता है, 'प्यार में थोड़ा पागल तो होना ही पड़ता है।' और यही बात फिल्म का पूरा सार बयां कर देती है। लेकिन नहीं, इस पागलपन को अल्फा मेल वाले प्यार से न जोड़ें। क्योंकि 'चांद मेरा दिल' चुपचाप इस राय को पलट देता है। यहां, गुस्से को अपने पार्टनर पर जबरदस्ती हिंसक होते नहीं दिखाया गया है।

बल्कि फिल्म में ये गुस्सा ही सब कुछ बिखरने का कारण बन जाता है। जब आरव अपना आपा खो देता है, तो फिल्म इसे तारीफ के तौर पर नहीं दिखाया गया है, बल्कि फिल्म इसे अफसोस के रूप में दर्शाती है। वह पश्चाताप में इतना डूब जाता है कि माफी पाने की उम्मीद में अपनी लाइफ को तहस-नहस करने को तैयार हो जाता है।

फिल्म के संगीत की बात करें तो सचिन-जिगर का म्यूजिक फिल्म की जान है। हर सीन बैकग्राउंड स्कोर से और दमदार हो जाता है। फिल्म की सोल का काम म्यूजिक ने किया है। विवेक एक पुरुष-महिला के रिश्ते की कच्ची कोमलता को असाधारण संवेदनशीलता के साथ दिखाने में खरे उतरे हैं। विवेक सोनी ने शानदार निर्देशन किया है। कही-कही फिल्म कमजोर होती दिखती है, लेकिन आपको बांधे रखती हैं।

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