बॉलीवुड में संजय लीला भंसाली को एक ऐसे फिल्ममेकर के तौर पर जाना जाता है जो अपनी फिल्मों के हर फ्रेम और हर धुन में 'परफेक्शन' ढूंढते हैं। उनकी भव्यता और बारीकियों पर पकड़ ही उनकी फिल्मों को कालजयी बनाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी परफेक्शन के चक्कर में उन्होंने हिंदी सिनेमा की दिग्गज गायिका आशा भोंसले की आवाज को भी रिजेक्ट कर दिया था? यह किस्सा साल 2002 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'देवदास' के सुपरहिट गाने 'मार डाला' का है।
जब फिल्म 'देवदास' का संगीत तैयार हो रहा था, तब भंसाली और संगीतकार इस्माइल दरबार एक ऐसी आवाज़ चाहते थे जो 'चंद्रमुखी' (माधुरी दीक्षित) के किरदार के दर्द, उसकी सादगी और उसकी अदाओं को पर्दे पर उतार सके। इसके लिए सबसे पहले आशा भोंसले का चयन किया गया। आशा जी ने अपने खास अंदाज़ में गाना रिकॉर्ड भी किया, जो तकनीकी रूप से बेहतरीन था।
गाना रिकॉर्ड होने के बाद जब भंसाली ने इसे सुना, तो उन्हें लगा कि गाने में वह 'चीज' गायब है जिसकी उन्हें तलाश थी। उन्हें लगा कि किरदार की मांग के हिसाब से गाने में कुछ बदलाव की जरूरत है। वे चाहते थे कि आशा जी इस गाने को दोबारा रिकॉर्ड करें। हालांकि, इस्माइल दरबार ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया। इस्माइल का मानना था कि आशा जी जैसी लेजेंडरी सिंगर से बार-बार रिकॉर्डिंग करवाना सही नहीं होगा। अंततः, भंसाली ने एक बड़ा फैसला लिया और आशा जी द्वारा गाए गए उस वर्जन को पूरी तरह से हटा दिया।
कविता कृष्णमूर्ति की एंट्री और ब्लॉकबस्टर सफलता
इसके बाद भंसाली ने इस चुनौतीपूर्ण गाने के लिए कविता कृष्णमूर्ति को चुना। कविता की आवाज़ में वह ठहराव और शास्त्रीय पुट था जो भंसाली ढूंढ रहे थे। जब गाना रिलीज हुआ, तो इसने इतिहास रच दिया। माधुरी दीक्षित के डांस और कविता की आवाज़ के तालमेल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और आज भी यह गाना बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन गानों में गिना जाता है।
कहा जाता है कि जब यह गाना जबरदस्त हिट हो गया, तब आशा भोंसले ने बहुत ही खेलभावना के साथ इस बात को स्वीकार किया। उन्होंने मज़ाकिया लहजे में भंसाली को ताना भी मारा कि शायद निर्देशक को उनकी आवाज़ अब पसंद नहीं आती। हालांकि, यह सब हंसी-मजाक में था, क्योंकि दोनों एक-दूसरे के काम का बहुत सम्मान करते हैं।