1960 की क्लासिक फिल्म ‘मुगल‑ए‑आजम’ में मधुबाला को अनारकली के रूप में याद किया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वे डायरेक्टर के. आसिफ की पहली पसंद बिलकुल नहीं थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रोल के लिए शुरुआत में उनका नाम बिल्कुल भी नहीं लिया जा रहा था। बल्कि फिल्म के खतरनाक विलेन और बड़े सितारे प्रेमनाथ की पत्नी और उस दौर की खूबसूरत अभिनेत्री बीना राय को अनारकली के लिए कास्ट किया जा रहा था।
बीना राय को था अनारकली का रोल
फिल्म की शुरुआती प्लानिंग के दौरान के. आसिफ ने भव्य और राजप्रसाद‑स्टाइल अनारकली के लिए बीना राय को ही तरजीह दी थी। वह उस समय बॉलीवुड की जानी‑मानी अभिनेत्री थीं और उनकी उपस्थिति स्क्रीन पर बहुत ध्यान खींचती थी। इसी कारण उनके नाम पर अनारकली का किरदार डाला जा रहा था, लेकिन बाद में जो ट्विस्ट आया उसने इतिहास बदल दिया।
‘मुगल‑ए‑आजम’ बनने में लगभग 14 साल लगे और इस दौरान कास्ट बार‑बार बदली। सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब फिल्म के लिए नरगिस को भी अनारकली के रोल पर विचार किया गया था, लेकिन वे दिलीप कुमार के साथ काम करने से इंकार कर बैठीं। रिपोर्ट्स के अनुसार उस समय दिलीप और नरगिस के बीच निजी तनाव चल रहा था, इसलिए उन्होंने फिल्म से हटने का फैसला किया। इसी खाली जगह को भरने के लिए बाद में अनारकली के रूप में मधुबाला को चुना गया।
मधुबाला और ‘सलीम‑अनारकली’ की अमर जोड़ी
मधुबाला ने इस रोल को इतनी जान दे दी कि वह आज भी सिर्फ अनारकली के नाम से याद की जाती हैं। उनकी यह अवधारणा इतनी असरदार थी कि बाद में लोग भूल गए कि शुरू में बीना राय और नरगिस जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों को ही इस फिल्म के लिए तलाशा जा चुका था। इस तरह ‘मुगल‑ए‑आजम’ आज भी न सिर्फ भव्य सेट, शानदार संगीत और शाही दृश्यों के लिए बल्कि मधुबाला के अनारकली के लिए इतिहास में दर्ज है।
बीना राय को भले ही ‘मुगल-ए-आजम’ का हिस्सा बनने का मौका नहीं मिला, लेकिन उन्होंने अपने करियर में कई यादगार फिल्में दीं। उनकी अदाकारी में सौम्यता और गहराई थी, जिसने उन्हें दर्शकों के बीच खास जगह दिलाई। वहीं, मधुबाला का नाम इस फिल्म के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया और वह भारतीय सिनेमा की अमर नायिका बन गईं।