Cinema Ka Flashback: प्रोफेशनलिज्म या जिद? जब अपनी फीस के लिए किशोर दा ने बीच में ही रुकवा दी थी देव साहब के गाने की रिकॉर्डिंग!

Cinema Ka Flashback: जोशीला फिल्म के गाने 'किसका रस्ता देखे' की रिकॉर्डिंग के दौरान किशोर कुमार ने तब तक माइक नहीं थामा, जब तक उनके सेक्रेटरी अब्दुल ने फीस मिलने का इशारा नहीं कर दिया। देव आनंद और आर.डी. बर्मन की मौजूदगी में हुआ यह मजेदार वाकया किशोर दा के 'नो मनी, नो वर्क' के उसूल और उनके मजाकिया अंदाज को दर्शाता है।

अपडेटेड Mar 21, 2026 पर 4:22 PM
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हिंदी सिनेमा के इतिहास में देव आनंद और किशोर कुमार की जोड़ी ने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने दिए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब किशोर दा अपने सबसे पसंदीदा अभिनेता देव साहब के लिए गाना गाने से पहले अपनी फीस पक्की करना चाहते थे? यह दिलचस्प किस्सा साल 1973 में आई फिल्म 'जोशीला' के सदाबहार गीत 'किसका रस्ता देखे' से जुड़ा है।

जब रिकॉर्डिंग रूम में रुक गया काम

फिल्म 'जोशीला' का निर्देशन दिग्गज निर्देशक यश चोपड़ा कर रहे थे और संगीत की जिम्मेदारी आर.डी. बर्मन (पंचम दा) के कंधों पर थी। इस फिल्म का गाना 'किसका रस्ता देखे' आज भी लोगों की जुबान पर रहता है। इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान एक ऐसा वाक्या हुआ जिसने वहां मौजूद हर किसी को हैरान कर दिया था।

किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार ने एक रियलिटी शो के दौरान इस राज से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि रिकॉर्डिंग के वक्त मिक्सर रूम में पंचम दा और देव आनंद मौजूद थे। सब कुछ तैयार था, लेकिन किशोर कुमार गाना शुरू नहीं कर रहे थे।


'अब्दुल' और पैसों का वो मजेदार किस्सा

जब काफी देर हो गई, तो देव आनंद ने पंचम दा से पूछा, "किशोर क्या कर रहा है? अभी तक टेक क्यों नहीं ले रहा?" पंचम दा ने तुरंत माइक पर किशोर दा से पूछा कि क्या वह रिकॉर्डिंग शुरू करने के लिए तैयार हैं? इस पर किशोर कुमार ने मजाकिया लहजे में कहा, "ठहरो, थोड़ा रुको।"

दरअसल, किशोर कुमार के ड्राइवर और सेक्रेटरी अब्दुल मुनाब जी उनके पैसों का हिसाब-किताब देखते थे। किशोर दा ने तुरंत रिकॉर्डिंग रूम से आवाज लगाई, "अब्दुल, पैसा मिला क्या? जल्दी बता दे!" जैसे ही अब्दुल ने इशारा किया कि पेमेंट मिल गई है, वैसे ही किशोर कुमार ने अपनी जादुई आवाज में 'किसका रस्ता देखे' गाना शुरू कर दिया और एक ही टेक में उसे अमर बना दिया।

अनुशासन और सिद्धांतों के पक्के थे किशोर दा

किशोर कुमार के बारे में यह मशहूर था कि वे काम और पैसे के मामले में बेहद सख्त थे। वे अक्सर 'नो मनी, नो वर्क' (पैसा नहीं तो काम नहीं) के सिद्धांत पर चलते थे। हालांकि, वे देव आनंद के बहुत बड़े प्रशंसक थे, लेकिन अपने काम की पेशेवर मर्यादा को कभी नहीं भूलते थे। अमित कुमार ने बताया कि बाबा (किशोर कुमार) तब तक रिकॉर्डिंग शुरू नहीं करते थे जब तक उन्हें उनकी तय फीस नहीं मिल जाती थी।

यह किस्सा हमें बताता है कि पुराने दौर के कलाकार न केवल अपनी कला के प्रति समर्पित थे, बल्कि अपने काम की वैल्यू करना भी जानते थे। किशोर दा का यह 'अब्दुल' वाला किस्सा आज भी बॉलीवुड के गलियारों में मुस्कुराहट बिखेर देता है।

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