बॉलीवुड की पुरानी यादें ताजा कर देने वाली एक दिलचस्प कहानी सामने आई है। 1991 की सुपरहिट फिल्म 'सड़क' के सेट से जुड़ा वह किस्सा आज भी चर्चा में है, जब संजय दत्त ने सह-अभिनेत्री पूजा भट्ट के साथ किसिंग सीन करने से साफ मना कर दिया। इस इनकार पर निर्देशक महेश भट्ट इतना भड़क गए कि उन्होंने संजय को 'ढोंगी' और 'पाखंडी' तक बोल दिया। पूजा भट्ट ने हाल ही में अपने पॉडकास्ट 'द पूजा भट्ट शो' में इस घटना को खुलकर साझा किया, जो दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर मजबूर कर रही है।
फिल्म 'सड़क' में संजय दत्त ने टैक्सी ड्राइवर रवि का किरदार निभाया था, जो पूजा भट्ट से प्यार करता है। एक महत्वपूर्ण सीन में दोनों को किस करना था, लेकिन संजय ने झिझक दिखाई। पूजा ने बताया, "मुझे संजय को चूमना था और मैं मन ही मन छिप जाना चाहती थी। लेकिन संजय ने कहा, 'मैं उसे किस नहीं करूंगा, क्योंकि मैंने इसे बचपन से देखा है।'" संजय पूजा को अपनी छोटी बहन जैसी मानते थे, क्योंकि उम्र में 23 साल का फासला था। पूजा भी बचपन में संजय की फैन थीं उनके कमरे में उनके पोस्टर्स लगे रहते थे।
इस बात पर महेश भट्ट का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने संजय से कहा, "यह पूरा ढोंग है। अगर तू उसे किस नहीं कर सकता, तो किसी और लड़की को किस करने का हक ही क्या तुझे?" महेश का यह तर्क था कि एक्टिंग में भावनाओं को सच्चाई से जीना पड़ता है, न कि निजी भावनाओं के चक्कर में पड़कर। विवाद इतना बढ़ा कि सेट पर तनाव फैल गया, लेकिन आखिरकार सीन शूट हो गया। पूजा ने यह भी बताया कि महेश ने उन्हें सलाह दी थी इंटिमेट सीन करते वक्त मन में वल्गरिटी न लाएं, बल्कि मासूमियत और गरिमा से करें, ताकि दर्शकों तक भाव पहुंचे।
'सड़क' ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया और सदाशिव अमरापुरकर की 'महारानी' आज भी याद की जाती है। पूजा-महेश की जोड़ी ने 90 के दशक में 'डैडी', 'जख्म' जैसी फिल्में दीं। यह किस्सा साबित करता है कि सेट पर असली जिंदगी के रिश्ते भी सिनेमाई होते हैं। संजय की मासूमियत और महेश का सख्त रवैया—दोनों ने मिलकर फिल्म को अमर बना दिया। आज के दौर में जब सीन शूटिंग आसान हो गई है, यह पुरानी बातें इंडस्ट्री की सादगी दिखाती हैं।
संजय दत्त और पूजा भट्ट दोनों ही उस समय अपने करियर के शुरुआती दौर में थे। सड़क ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई। हालांकि यह किस्सा आज भी याद किया जाता है क्योंकि इसने दिखाया कि कलाकारों के लिए निजी असहजता और पेशेवर जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना कितना मुश्किल होता है।