बॉलीवुड के स्वर सम्राट किशोर कुमार को एक बार अमिताभ बच्चन की फिल्म 'गिरफ्तार' के सदाबहार गाने 'धूप में निकला ना करो रूप की रानी' के लिए हटाकर युवा गायक शब्बीर कुमार को मौका दिया गया था। यह घटना 1985 की है, जब संगीतकार बप्पी लाहिरी ने किशोर दा की आवाज को 'पुरानी' मानते हुए नया प्रयोग किया। गाना आशा भोसले और शब्बीर कुमार की जोड़ी ने गाया, जो आज भी लाखों दिलों पर राज करता है।
गाने की लोकप्रियता और विवाद
फिल्म 'गिरफ्तार' में अमिताभ बच्चन और माधवी पर फिल्माया गया यह गाना इंदीवर के लिखे बोल और बप्पी लाहिड़ी के डिस्को बीट्स से सजा था। गाने में अमिताभ का रोमांटिक अंदाज और माधवी की खूबसूरती ने इसे अमर बना दिया। लेकिन किशोर कुमार को हटाए जाने पर बॉलीवुड में खासी चर्चा हुई। किशोर दा के चाहने वालों ने इसे गलत बताया, क्योंकि उनकी यूनिक आवाज अमिताभ के स्टाइल से मैच करती थी। बप्पी लाहिड़ी ने सफाई दी कि शब्बीर की युवा ऊर्जा गाने को फ्रेश लुक देगी।
शब्बीर कुमार, जो किशोर कुमार के करीबी थे, ने इस मौके को लपक लिया। 'धूप में निकला ना करो...' ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। गाने के बोल जैसे "गोरा रंग काला ना पड़ जाए, मस्त मस्त आंखों से छलकाओ ना मदीरा" आज भी वायरल हैं। शब्बीर ने बाद में कई अमिताभ हिट गाए, लेकिन यह उनका ब्रेकथ्रू साबित हुआ। किशोर दा ने इसे दिल पर नहीं लिया और शब्बीर को आशीर्वाद दिया।
बॉलीवुड के बदलते दौर का प्रतीक
यह घटना 80 के दशक के संगीत परिवर्तन को दर्शाती है, जब नए गायकों को मौका मिलने लगा। किशोर कुमार की विरासत बरकरार रही, लेकिन शब्बीर जैसे कलाकारों ने नई पीढ़ी को जोड़ा। आज यूट्यूब पर गाना करोड़ों व्यूज बटोर रहा है। यह किस्सा साबित करता है कि कभी-कभी 'नया' प्रयोग इतिहास रच जाता है। अमिताभ और किशोर की जोड़ी याद आती है, लेकिन शब्बीर ने साबित कर दिया कि प्रतिभा बुलंदी तक पहुंचा ले जाती है।