सलमान खान के पर्सनालिटी राइट्स केस में दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पहले नोटिस देना अनिवार्य

Salman Khan: दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को अभिनेता सलमान खान के उस मुकदमे की सुनवाई शुरू की, जिसमें उन्होंने अपनी व्यक्तित्व अधिकारों (personality rights) की सुरक्षा की मांग की थी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने की।

अपडेटेड Dec 11, 2025 पर 12:45 PM
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सलमान खान के पर्सनालिटी राइट्स केस में दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पहले नोटिस देना अनिवार्य

Salman Khan: दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को अभिनेता सलमान खान के उस मुकदमे की सुनवाई शुरू की, जिसमें उन्होंने अपनी व्यक्तित्व अधिकारों (personality rights) की सुरक्षा की मांग की थी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने की। सलमान खान की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने आरोपियों की पहचान बताने वाले दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति अरोड़ा ने अजय देवगन और एनटी रामाराव मामलों में अपने पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि याचिकाकर्ताओं को अदालत के हस्तक्षेप की मांग करने से पहले सोशल मीडिया मध्यस्थों (intermediaries) से संपर्क करना चाहिए।

न्यायमूर्ति अरोड़ा ने संकेत दिया कि यहां भी वही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सलमान खान को संबंधित प्लेटफॉर्मों को सूचित करने का निर्देश दिया जाएगा, और यदि एक सप्ताह के बाद भी आपत्तियां बनी रहती हैं, तो न्यायालय संयुक्त आदेश जारी करने पर विचार करेगा।


वकील सेठी ने इस निर्देश से सहमति जताई, लेकिन साथ ही कहा कि गैर-मध्यस्थ प्रतिवादियों-जैसे कि ई-मार्केटप्लेस और ऐसी संस्थाएं जिन पर खान की अनुमति के बिना सामान बेचने या उनकी छवि का दुरुपयोग करने का आरोप है—के खिलाफ भी कार्रवाई आवश्यक है। न्यायालय ने कार्यवाही से पहले इन पक्षों के बारे में और अधिक जानकारी मांगी।

दिल्ली हाई कोर्ट व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए एक प्रमुख न्यायालय बन गया है। इसने अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, नागार्जुन, अनिल कपूर, अभिषेक बच्चन और निर्माता राज श्यामानी जैसी हस्तियों को पहले ही सशक्त संरक्षण प्रदान किया है, यह मानते हुए कि केवल वे ही यह तय कर सकते हैं कि उनके नाम, छवि या पहचान का व्यावसायिक रूप से कैसे उपयोग किया जाए।

न्यायालय AI से बने वीडियो, डीपफेक और अन्य एडिटेड कंटेंट जैसी नई समस्याओं से भी निपट रहा है, जो किसी व्यक्ति की ऑनलाइन छवि या प्रतिष्ठा को तेजी से खराब कर सकती हैं। न्यायाधीशों ने चेतावनी दी है कि ये नकली प्रस्तुतियां किसी व्यक्ति की निजता और गरिमा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।

साथ ही, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक कलात्मक कार्य, व्यंग्य, समाचार रिपोर्टिंग और टिप्पणी को तब तक संरक्षित किया जाना चाहिए, जब तक वे संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहकर प्रस्तुत किए जाएं।

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