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पाकिस्तानी कंटेंट पर डिजिटल बैन के बाद भी भारत में जारी स्ट्रीमिंग, ड्रामों से लेकर प्रोपेगैंडा तक खुलेआम देख रहे दर्शक

भारत सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से आने वाले डिजिटल कंटेंट पर सख्त बैन लगाया था। उद्देश्य साफ था देश में फैल रहे प्रोपेगैंडा और संवेदनशील माहौल को रोकना है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज भी पाकिस्तानी ड्रामे, वेब सीरीज और राजनीतिक वीडियो भारतीय दर्शकों तक पहुंच रहे हैं।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Jan 23, 2026 पर 8:20 PM
पाकिस्तानी कंटेंट पर डिजिटल बैन के बाद भी भारत में जारी स्ट्रीमिंग, ड्रामों से लेकर प्रोपेगैंडा तक खुलेआम देख रहे दर्शक

अप्रैल 2025 के भयानक पहलगाम आतंकी हमले के बाद सरकार ने पाकिस्तानी डिजिटल कंटेंट पर सख्ती बरतते हुए सभी OTT प्लेटफॉर्म्स, स्ट्रीमिंग सर्विसेज को पाक मूल का वेब सीरीज, फिल्में, गाने, पॉडकास्ट हटाने का आदेश दिया था। लेकिन इंडिया टुडे की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस जांच से साफ है कि यह बैन कागजों तक सीमित रह गया। पाकिस्तानी ड्रामा, राजनीतिक शोज, मिलिट्री प्रोपगैंडा और यहां तक कि एक्सट्रीमिस्ट कंटेंट भी लूपहोल्स से भारतीय दर्शकों तक पहुंच रहा है।

ARY डिजिटल का यूट्यूब चैनल तो 'पब्लिक ऑर्डर' के नाम पर ब्लॉक हो गया, लेकिन उनकी ऑफिशियल वेबसाइट पर वही ड्रामा सब्सक्रिप्शन से स्ट्रीम हो रहे हैं। हर पल जियो प्लेटफॉर्म का भी यही हाल जियो न्यूज ब्लॉक है, लेकिन साइट पर सीरियल्स बिना रुकावट चल रहे। इंडिया टुडे ने 15 ऐसे यूट्यूब चैनल पाए जो पाक ड्रामा दिखा रहे और मोनेटाइज कर रहे हैं। 18 मिलियन सब्सक्राइबर्स वाले 5 लाइफस्टाइल-व्लॉग चैनल भी भारतीय व्यूज कमा रहे हैं। इंस्टाग्राम पर बड़े एक्टर्स ब्लॉक हैं, लेकिन 14 मिलियन फॉलोअर्स वाले 4 क्रिएटर्स अल्टरनेटिव प्लेटफॉर्म्स से कमाई कर रहे हैं। तीन पाक पॉडकास्ट भी राजनीति पर खुलेआम चर्चा कर रहे हैं।

चिंता की बात यह है कि रेडियो पाकिस्तान का यूट्यूब चैनल बेखौफ चल रहा, जहां यासीन मलिक की पत्नी मुषाल हुसैन मलिक का इंटरव्यू था। DG ISPR (पाक आर्मी का मीडिया विंग) का X अकाउंट भी एंटी-इंडिया कंटेंट दिखा रहा। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ब्लॉग्स और द रेसिस्टेंस फ्रंट जैसे प्लेटफॉर्म एक्सट्रीमिस्ट आइडियोलॉजी फैला रहे हैं। फेसबुक पर पब्लिक डिफेंस इन्फॉर्मेशन जैसे पेज मिलिट्री प्रोपगैंडा चला रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। कई बार इन वीडियो में भारत विरोधी नैरेटिव भी शामिल होता है, जो दर्शकों के मनोविज्ञान पर असर डाल सकता है। यही वजह है कि सरकार ने डिजिटल बैन लागू किया था। लेकिन तकनीकी खामियों और प्लेटफॉर्म्स की ढीली मॉनिटरिंग के कारण यह कंटेंट अब भी आसानी से देखा जा सकता है।

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