Cinema Ka Flashback: आज के समय में जहां हिंदी गानों में लिरिक्स हर मर्यादा को तोड़ते नजर आ रहे हैं, वहीं 60-70 के दशक में सिंगर खूबसूरत शब्दों में पिरोए हुए सदाबहार गानों से दर्शकों को मग्न कर देते थे। वहीं बात लता दीदी की करें तो उनके लिए संगीत पूजा थी। वह अपने गानों में जहां भी उटपटांग शब्दों को बर्दाश्त नहीं करती थी। वह अपने उसूल कीकितनी पक्की थीं, चलिए आपको बताते हैं।
आप सभी ने देवा आनंद साहब का गाना अभी न जाओ छोड़कर....दिल अभी भरा नहीं...., तो सुना होगा। इस गाने को 45 साल हो गए हैं। ये गाना साल 1961 में आई फिल्म 'हम दोनों' का है, जो आज भी लोगों की जुबान पर चढ़ा रहता है। इस गाने को मोहम्मद रफी और आशा भोंसले ने अपनी आवाज दी हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये गाना पहले लता दीदी को ऑफर किया गया था। वह रफी साहब के साथ इस गाने को गाने के लिए तैयार भी हो गई थीं। लेकिन जैसे ही उनकी नजर इस गाने के अंतरा में लिखी दो लाइन पर गई, वह नाराज हो गईं और गाने को अश्लील कह कर रिजेक्ट कर दिया था।
गाने कि जिन लाइन पर दीदी नाराज हो गई थीं वह थी 'अधूरी आस छोड़कर, अधूरी प्यास छोड़कर'...। इन दो लाइनों पर उन्हें आपत्ति थी। लता दीदी ने मेकर्स से कहा था कि गाना बहुत रोमांटिक और बोल्ड हैं। वह इस गाने को नहीं गाएंगी। गाने के बोल उनकी इमेज के हिसाब से सुटेबल नहीं थे। बाद में इस गाने को रफी साहब और आशा भोंसले ने अपनी आवाज दी थी। गाना सुपरडुपर हिट हुआ था। आज भी गाने का क्रेज लोगों के सिर चढ़कर बोलता है।
लता मंगेशकर की ये खास बात थी कि वो अपनी सादगी और उसूलों पर डटी रहती थीं। उनके सालों के करियर में ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और कई बड़े प्रोजेक्ट्स को सीधा मना कर दिया। लता जी ने हमेशा साफ-सुथरे गानों को प्रथमिकता दी है। अगर उन्हें किसी गाने के बोल थोड़े भी कम वजनी या अभद्र लगते थे, तो वे उसे गाने को रिजेक्ट कर देती थीं।