Cinema Ka Flashback: आज के समय में जहां हिंदी गानों में लिरिक्स हर मर्यादा को तोड़ते नजर आ रहे हैं, वहीं 60-70 के दशक में सिंगर खूबसूरत शब्दों में पिरोए हुए सदाबहार गानों से दर्शकों को मग्न कर देते थे। वहीं बात लता दीदी की करें तो उनके लिए संगीत पूजा थी। वह अपने गानों में जहां भी उटपटांग शब्दों को बर्दाश्त नहीं करती थी। वह अपने उसूल कीकितनी पक्की थीं, चलिए आपको बताते हैं।
