फिल्म- धुरंधर द रिवेंज
फिल्म- धुरंधर द रिवेंज
रेटिंग- 4/5
कलाकार- रणवीर सिंह, सारा अर्जुन, आर माधवन, संजय दत्त, आर्जुन रामपाल, राकेश वेदी
निर्देशक- आदित्य धर
Dhurandhar 2 Review: ‘धुरंधर 2’ ने रिलीज होते ही दर्शकों का दिल जीत लिया है। इस फिल्म का नाम हिंदी सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा जाने वाले हैं। फिल्म के लिए आप जैसे ही थिएटर में घुसेंगे आपको कहानी के सारे किरदार, प्लॉट ट्विस्ट, डायलॉग, गाने रिकॉल होने लगते हैं। आदित्य धर की फिल्ममेकिंग ने ‘धुरंधर’ से ऐसा दिल जीता है कि हमज़ा की कहानी पूरी देखने के लिए पिछले तीन महीने से दिमाग में खलबली मची हुई है। आदित्य ये कुलबुलाहट जानते हैं और उन्होंने इसे और ज्यादा भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
नए पार्ट में हमजा अली मजारी उर्फ जसकिरत सिंह रंगी (रणवीर सिंह) का किरदार बेवजह गहराई में जाने में जरा भी समय बर्बाद नहीं करता है और एक इमोशनल बैकस्टोरी तैयार करता है, जो उसकी मोटिवेशन बढ़ाती है। पर्सनल लॉस से आहत होकर, हमजा की जर्नी में तब एक नया मोड़ आता है जब उसे भारत सरकार द्वारा स्पाई के रूप में काम करने के लिए भर्ती किया जाता है। यहीं से कहानी वापस वहीं पहुंचती है जहां पहली फिल्म खत्म हुई थी। रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) की मैत के बाद, लयारी का सिंहासन खाली हो जाता है।
हमजा अपने मिशन में पूरी तरह से जुट जाता है, पाकिस्तानी अंडरवर्ल्ड को अंदर से ही खत्म करते हुए नंबर एक बनने के करीब पहुंचता जाता है। लेकिन यह सब इतना आसान नहीं है। हर कदम की एक कीमत चुकानी पड़ती है, जिससे उसे अपनी पहचान, अपने रिश्तों... यहां तक कि अपनी जान को भी दांव पर लगाना पड़ता है।
इस बार भी कहानी 6 चैप्टर में बंटी है, लेकिन पहले पार्ट की घटनाक्रम छोटा दिखा है। अधिकांश लीड रोल वापस आ रहे हैं, लेकिन अक्षय खन्ना (रहमान के रूप में) फिल्म में नहीं हैं। कहानी आगे बढ़ने के बावजूद दर्शकों को उनकी कमी जरूर खलेगी। फिल्म का पहला पार्ट तेज़ी से आगे बढ़ता है, निर्देशक आदित्य धर ने यह सुनिश्चित किया है कि रोमांच कहीं कम न हो। फिर भी, इसकी बनावट में एक बदलाव नज़र आता है। धुरंधर में वास्तविकता से भरपूर लगने वाली दुनिया का निर्माण इस बार थोड़ा सा कमज़ोर लग रहा है। दायरा बड़ा है, लेकिन बारीकियां कहीं-कही खटकती हैं।
कहानी कभी-कभी स्मूथ है, लेकिन कहीं-कहीं कुछ स्पष्ट कमियां हैं, जो कुछ पलों के लिए आपको फिल्म का बोरिंग अनुभव देती हैं। एक ऐसी फिल्म के लिए, जिसने अपने पहले भाग में बारीक के लिए एक मिसाल कायम की थी। इसकी कमी को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है। फिल्म को असल में जो चीज़ बचाती है, वो है इंटरवल के बाद का सारा हिस्सा। अंतराल का सीन बिल्कुल सटीक बैठता है, और उसके बाद दूसरा भाग कहीं अधिक दिलचस्प हो जाता है। निर्देशक आदित्य ने अच्छा पेसेंस दिखाया है। वो तालियां बटोरने के लिए पहली फिल्म के सीधे-सादे फ्लैशबैक पर निर्भर नहीं रहते हैं। कहानी फ्लैशबैक में फंसने के बजाय आगे बढ़ती है।
इस बार कुछ किरदार कमजोर भी दिखे हैं। उज़ैर (दानिश पंडोर), उल्फत (सौम्या टंडन) और आलम (गौरव गेरा) को ज़्यादा स्क्रीन टाइम नहीं दिया गया है, लेकिन फिर भी वे अपने छोटे-छोटे सीन में इंप्रेस करने में कामयाब रहते हैं। अभिनय के लिहाज से रणवीर सिंह फिल्म को अपने कंधों पर उठाए हैं। जसकिरत सिंह रंगी और हमजा, दोनों किरदारों में वो बड़ी स्मूथली ढल जाते हैं। आप उनके दर्द और संघर्ष को महसूस कर सकते हैं। उन्होंने अबतक का अपना सबसे शानदार परफॉमेंस इस फिल्म में दिया है।
अर्जुन रामपाल मेजर इकबाल के रूप में एक खूंखार किरदार में नजर आते हैं, लेकिन वो अपने लिए एक मिसाल कायम करते हैं। पहली फिल्म में उनकी मौजूदगी कहीं ज्यादा खौफनाक थी। संजय दत्त एसपी असलम के रूप में अच्छा अभिनय करते हैं। आर माधवन को इस फिल्म में ज्यादा स्क्रीन टाइम मिला है, और वो अपनी छाप छोड़ते हैं। राकेश बेदी भी जमील जमाली के रूप में बेहद प्रभावशाली हैं, जिन्हें देखना आनंददायक है। यालीना के रूप में सारा अर्जुन असरदार हैं।
धुरंधर 1 की जान कहे जाने वाला शशवत सचदेव का म्यूजिक बेस्ट है। पुराने हिट गानों की मौजूदगी ने माहौल बना दिया है। बैकग्राउंड स्कोर, खासकर क्लाइमेक्स में, फिल्म को काफी मजबूती देता है। कुल मिलाकर, धुरंधर: द रिवेंज दो बिल्कुल अलग-अलग हिस्सों वाली फिल्म है। इस बार कहीं कहीं लेखन ढीला लगता है, और बारीकियां, जो कभी इसकी सबसे बड़ी ताकत हुआ करती थीं, इस बार उतनी नहीं हैं।
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