बॉलीवुड के चर्चित निर्देशक श्रीराम राघवन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘इक्कीस’ सेंसर बोर्ड की कसौटी पर खरी उतर चुकी है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने फिल्म को UA सर्टिफिकेट दिया है, यानी यह फिल्म बच्चों के लिए अभिभावकों की देखरेख में उपयुक्त मानी गई है। हालांकि, बोर्ड ने फिल्म से भारत-पाकिस्तान संबंधों पर आधारित 15 सेकंड का एक डायलॉग हटाने का निर्देश दिया है।
फिल्म का रनटाइम लगभग 2 घंटे 36 मिनट तय किया गया है। यह लंबाई दर्शाती है कि राघवन ने कहानी को विस्तार और गहराई से पेश किया है। ‘इक्कीस’ को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है क्योंकि यह निर्देशक की पहली युद्ध-आधारित महाकाव्य फिल्म है। अब तक वह थ्रिलर और रहस्य से भरी कहानियों के लिए जाने जाते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने ऐतिहासिक और भावनात्मक पृष्ठभूमि को चुना है।
सेंसर बोर्ड के मुख्य बदलाव
बोर्ड ने शराब के ब्रांड नाम को ब्लर करने और एंटी-स्मोकिंग मैसेज जोड़ने का आदेश दिया है। ये बदलाव फिल्म की संवेदनशीलता को बनाए रखने के लिए हैं। इन सबके बाद फिल्म को पारिवारिक दर्शकों के लिए उपयुक्त माना गया है। रनटाइम 147 मिनट 15 सेकंड रह गया, जो दर्शकों को रोमांचक अनुभव देगा।
फिल्म की कहानी और स्टार कास्ट
'इक्कीस' सबसे युवा परम वीर चक्र विजेता मेजर अरुण खेतारपाल की वीर गाथा पर बनी है। अरुण के रोल में अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा डेब्यू कर रहे हैं। धर्मेंद्र उनके पिता बने हैं, जो उनकी आखिरी फिल्म साबित होगी। जयदीप अहलावत, सिमर भाटिया और दिवंगत असरानी भी अहम भूमिकाओं में हैं। राघवन का निर्देशन इस फिल्म को थ्रिलर और इमोशन का अनोखा मिश्रण बनाएगा।
CBFC का यह कदम बताता है कि संवेदनशील मुद्दों पर फिल्म निर्माताओं को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। भारत-पाक रिश्तों पर आधारित संवाद अक्सर विवाद का कारण बनते हैं, और बोर्ड ने शायद इसी वजह से यह कट लगाया। हालांकि, फिल्म की बाकी कहानी जस की तस रखी गई है, जिससे दर्शकों को निर्देशक का असली विज़न देखने को मिलेगा। राघवन ने खुद कहा है कि वह किसी और की शैली की नकल नहीं करना चाहते। ‘इक्कीस’ उनके लिए एक नया प्रयोग है, जो दर्शकों को युद्ध की पृष्ठभूमि में मानवीय भावनाओं और संघर्ष की झलक दिखाएगा।