फिल्म- किस किस को प्यार करूं 2
फिल्म- किस किस को प्यार करूं 2
रेटिंग-3/5
निर्देशक-अनुकल्प गोस्वामी
कलाकार- कपिल शर्मा, हीरा वरीना, त्रिधा चौधरी, आयशा खान, पारुल गुलाटी, सुशांत सिंह और मनजोत सिंह
Kis Kisko Pyaar Karoon 2 Review: कपिल शर्मा का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे दिमाग में कॉमेडी का ख्याल आता है। उनकी टाइमिंग, मासूमियत और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कॉमेडी उन्हें हर घर में फेमस बना चुका है। लंबे समय बाद कपिल अपनी नई फिल्म 'किस किसको प्यार करूं 2' के साथ वापसी कर रहे हैं। पहली फिल्म ने दर्शकों को खूब हंसाया था, लेकिन क्या दूसरी फिल्म भी वही जादू बिखेर पाएगी? आइए जानते हैं।
फिल्म की कहानी
अगर आपने 2015 में आई फिल्म 'किस किसको प्यार करूं' देखी है, तो कहानी आपको जानी-पहचानी लगेगी। फिल्म की शुरुआत मोहन नाम के एक भोले-भाले हिंदू लड़के से होती है, जिसे कपिल शर्मा ने अपने खास अंदाज में निभाया है। मोहन को हीरा वरीना के किरदार सान्या से बेइंतहा प्यार है। प्यार के लिए मोहन किसी भी हद तक जाने को तैयार है, यहां तक कि अपना धर्म बदलने तक को भी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर है।
सान्या से शादी की उलझनों में फंसते हुए मोहन की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जहां वह एक नहीं बल्कि तीन अलग-अलग धर्मों की तीन महिलाओं से शादी कर लेता है। यह सुनकर ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि फिल्म किस तरह की कॉमेडी पर बेस्ड है। कपिल के साथ पर्दे पर दिखने वाली एक्ट्रेसेस में मीरा (त्रिधा चौधरी) हैं, जिनसे वह हिंदू बनकर शादी करते हैं, रूही (आयशा खान), जिनके लिए वह महमूद होने का नाटक करते हैं, और जेनी (पारुल गुलाटी), जिनके लिए वह माइकल बन जाते हैं।
मोहन की नीयत बुरी नहीं है, वह एक नेक दिल इंसान है जो सबको खुश रखना चाहता है। लेकिन यही अच्छाई कहानी को एक उलझे हुए जाल में फंसा देती है। तीन पत्नियां, तीन पहचानें और एक बेबस मोहन - हालात तब और बिगड़ जाते हैं जब उसका पहला प्यार, सान्या, फिर से उसके दरवाजे पर दस्तक देती है। जैसे ही मोहन चौथी शादी की दहलीज पर पहुंचता है, उसकी तीनों पत्नियों को उसकी सच्चाई पता चल जाती है। आगे क्या होता है? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।
फिल्म का निर्देशन
जब बात कपिल शर्मा की हो, तो फिल्म में कॉमेडी का तड़का लगना लगभग नामुमकिन है। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसका साफ-सुथरी कॉमेडी है। आज के दौर में, जहां कॉमेडी अक्सर डबल मीनिंग वाली होती है, यह फिल्म फ्रेश लगती है। कोई वल्गैरटी नहीं, किसी को नीचा दिखाने की कोशिश नहीं, बस मजेदार फैमली कॉमेडी।
यह फिल्म कई मायनों में 90 के दशक के सिनेमा की याद दिलाती है, खासकर गोविंदा की उन मनोरंजक फिल्मों की, जिनमें उन्हें एक साथ दो या दो से अधिक रिश्तों को संभालते हुए दिखाया जाता था। वही उलझन और गलतियों का वही मनोरंजक सिलसिला है ये फिल्म। कुछ दृश्य नकली लगते हैं। कभी-कभी फिल्म अपने पुराने फॉर्मूले में फंसी भी दिखती है। लेकिन अगर आप थोड़ा दिमाग शांत करके सिर्फ मनोरंजन के लिए फिल्म देखने जाएं, तो यह आपको पसंद आएगी।
कलाकारों की एक्टिंग
एक्टिंग की बात करें तो कपिल शर्मा एक बार फिर साबित करते हैं कि वह कमेडी के बादशाह क्यों है। इस बार उन्होंने अपने काम में पहले से कहीं ज्यादा पकड़ बनाई है। इमोशनल सीन में भी वे पहले से बेहतर नजर आते हैं। त्रिधा चौधरी ने इंप्रेस किया है। आयशा खान अपनी खूबसूरती से दर्शकों का दिल जीत लेती हैं। पारुल गुलाटी का किरदार भले ही सबसे छोटा हो, लेकिन उन्होंने इसे पूरी ईमानदारी से निभाया है। हीरा वरीना फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी हैं। असरानी को आखिरी बार पर्दे पर देखना शानदार है। उनके होने से ही माहौल हल्का-फुल्का और खुशनुमा हो जाता है। वहीं, जॉनी लीवर की बेटी जेमी लीवर का काम दमदार है। उन्होंने साबित कर दिया है कि कॉमेडी का हुनर उनके खून में है।
यह फिल्म फैमली के साथ देखने के लिए एकदम सही है और इसमें कोई भी अश्लीलता या सीन आपको असहज नहीं करेगा। कई डायलॉग आपको खूब हंसाएंगे। हालांकि फिल्म में कुछ कमियां हैं, फिर भी यह मनोरंजन करेगी। फिल्म को एक बार देखा जा सकता है।
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