Sarke Chunar: 'सरके चुनर' नहीं पहला अशलील गाना, इससे पहले भी बॉलीवुड में रिलीज हो चुके ऐसे गानों की है लंबी लिस्ट...
Bollywood obscene songs: नोरा फतेही के गाने सरके चुनर को लेकर मची हाय तौबा ने म्यूजिक इंडस्ट्री और लिरिक्स आर्टिस्ट पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन हिंदी सिनेमा में ये पहला गाना नहीं, इससे पहले भी कई डबल मीनिंग सॉन्ग की यहां लिस्ट मौजूद, जिनमें हिंदी सिनेमा के ए लिस्टर एक्ट्रेस-एक्ट्रेस नजर आए हैं।
'सरके चुनर' से पहले भी बॉलीवुड में रिलीज हो चुके ऐसे अशलील गानों की लंबी लिस्ट है...
Bollywood obscene songs: नोरा फतेही का गाना "सरके चुनर तेरी सरके" (फिल्म 'केडी: द डेविल' से) न सिर्फ वायरल हुआ, बल्कि इसके अश्लील बोल और अश्लील सीन ने हंगामा मचा दिया। शिकायतों की बाढ़ आ गई, मशहूर हस्तियां भी इस बहस में शामिल हो गईं और हिंदी वर्जन को रिलीज होने के कुछ ही दिनों में यूट्यूब से हटा दिया गया। इस विवाद ने बॉलीवुड में अश्लीलता को लेकर चल रही पुरानी बहस को फिर से हवा दे दी है। लेकिन सच्चाई यह है कि यह कोई नई बात नहीं है—हिंदी फिल्मी गानों में लंबे समय से डबल मीनिंग शब्दों का इस्तेमाल होता रहा है। देखिए ऐसे गानों की लिस्ट...
कुंडी मत खटकाओ राजा, सीधा अंदर आओ राजा
चित्रांगदा सिंह का ये गाना काफी पॉपुलर है। शादी से लेकर पार्टी तक में डीजे सॉन्ग लिस्ट में शामिल होता है। इस गाने के बोल आप अपने परिवार के सामने गुनगुना नहीं सकते हैं।
कद्दू कटेगा तो सबमें बटेगा
सोनू सूद का ये आइटम सॉन्ग भी काफी फेमस हैं। लेकिन इसके डबल मीनिंग बोल आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे।
चोली के पीछे क्या है (खलनायक, 1993)
उस दौर के सबसे चर्चित गानों में से एक, इस सॉन्ग ने जानबूझकर पूछे गए अशलील सवाल ने लिसिनर को एंटरटेन किया है। यहां डबल मीनिंग शब्दों का इस्तेमाल कैसे किया गया है, आप जानते ही हैं। 90 के दशक के विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, यह गाना काफी पॉपुलर हुआ था। ये बात बताती है कि लिसिनर ऐसे शब्दों से ज्यादा अटरेक्ट होते हैं।
सरकाये लो खटिया (राजा बाबू, 1994)
पहली नज़र में यह मज़ेदार और अटैक्टिव लगता है—लेकिन गौर से देखने और सुनने पर इसमें भी गलत हिंट का यूज हो रहा हैं। गाना और डांस इसे अशलील बनाते हैं। यह इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे बॉलीवुड ने कॉमेडी का इस्तेमाल करके अशलीलता को आराम से हाइड कर दिया है।
मैं माल गाड़ी (अंदाज़, 1994)
यह गाना अपने इरादों को छिपाता नहीं है। गाड़ी जैसे शब्दों का सहारा लेते हुए, यह गाना और सीन दोनों एडल्ट हिंट देता है। इसका साहसिक मंचन कल्पना के लिए बहुत कम गुंजाइश छोड़ता है, चालाकी से शब्दों के प्रयोग के बजाय ध्यान आकर्षित करने पर ज़ोर देता है।
खड़ा है खड़ा है (अंदाज़, 1994)
बोल भले ही सरल हों, लेकिन दमदार डांस के साथ मिलकर इसका घटिया मैसेज स्पष्ट हो जाता है। यह साबित करता है कि हिंट देने के लिए हमेशा चालाकीभरे लेखन की आवश्यकता नहीं होती—कभी-कभी सीधा-सादा परफॉमेंस ही प्रभाव डालने के लिए पर्याप्त होता है।
इन द नाइट नो कंट्रोल (खिलाड़ियों का खिलाड़ी, 1996)
अपने दौर के हिसाब से यह गाना बेहद बोल्ड था, जो 90 के दशक के आम बॉलीवुड गानों की तुलना में ज्यादा बोल्डनेस दिखाता है। रेखा और अक्षय कुमार की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री लाजवाब थी—और कहा जाता है कि इससे रवीना टंडन असहज हो गई थीं।
दिल में लेती है (अमानात, 1994)
दिल में लेती है गाना इशारों में कही गई बातों से परे जाकर सीधे तौर पर उकसाने वाला है। इसके बोल ऐसी चीजों की बात करते हैं जो मनोरंजन के बजाय चौंकाने वाले हैं, जिससे लिसिनर सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि क्या सिनेमा में कोई लिमिट तय की गई है।
हम तो तंबू में बंबू (मर्द, 1985)
मेनस्ट्रीम फिल्मों में अक्सर कॉमेडी का प्रयोग होता था, और यह गाना भी इसका अपवाद नहीं है। प्रॉप्स और बॉडी कॉमेडी के माध्यम से इस गाने को रिलीज किया गया था। गाना आप परिवार तो छोड़िए अपने पार्टनर के साथ सुनने में शर्मा जाएं।
मैं लाया हूं चूहा अपना (यार गद्दार, 1994)
कॉमेडी का सहारा लेते हुए इस गाने में अशलीलता की सारी हदें पार कर दी गई थीं। इसके बोल ऐसे हैं कि आप गुनदुना भी नहीं सकते हैं। बॉलीवुड में शायद अशलीलता की सीमा कभी तय ही नहीं की गई है।