माधुरी दीक्षित ने शेयर किया 'देवदास' में भंसाली के साथ काम करने का एक्सपीरियंस, कही ये बात

संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' हिंदी सिनेमा की बेहतरीन और यादगार क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिकाओं में थे। हाल ही में माधुरी ने फिल्म में चंद्रमुखी का किरदार निभाने और भंसाली के साथ काम करने का एक्सीपीरिएंस शेयर किया है

अपडेटेड Feb 09, 2026 पर 8:41 PM
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माधुरी दीक्षित ने संजय लीला भंसाली के साथ फिल्म देवदास में काम करने के अपने एक्सीपीरिएंस शेयर किया है

साल 2002 में रिलीज हुई संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' हिंदी सिनेमा की बेहतरीन और यादगार क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित लीड रोल में नजर आई थी। वहीं हाल ही में माधुरी दीक्षित ने संजय लीला भंसाली के साथ फिल्म देवदास में काम करने के अपने एक्सीपीरिएंस शेयर किया है। इस फिल्म में माधुरी दीक्षित ने चंद्रमुखी का किरदार निभाया था। माधुरी ने बताया कि भंसाली सिर्फ पर्दे पर ही नहीं, बल्कि फिल्म बनाने की पूरी प्रक्रिया में भी कला और कविता जैसा खूबसूरत अंदाज लेकर आते हैं, जिसकी वजह से ‘देवदास’ एक खास और शानदार फिल्म बन सकी।

माधुरी दीक्षित ने फिल्म देवदास में अपने चंद्रमुखी के किरदार को बेहद गहरा और इमोशन से भरा हुआ बताया। उन्होंने कहा कि, "मुझे भंसाली जी के साथ काम करने में बहुत मजा आया। चंद्रमुखी फिल्म में एक बहुत ही जरूरी किरदार था। सिर्फ डांस मूव्स ही नहीं, बल्कि फिल्म का हर सीन कविता जैसा लगता है।"

'काम करके काफी अच्छा लगा'


माधुरी दीक्षित ने चंद्रमुखी के किरदार की आध्यात्मिक गहराई के बारे में बात करते हुए कहा कि इस भूमिका ने उन्हें मीरा बाई की याद दिलाई। उन्होंने बताया कि, "चंद्रमुखी के अंदर एक जन्मजात मासूमियत है। वह मीरा की तरह हैं, क्योंकि वह किसी ऐसे व्यक्ति से प्यार करती हैं जिसके बारे में उन्हें पता है कि वह उनसे प्यार नहीं कर सकता।" माधुरी ने कहा कि, इस किरदार को निभाते समय उन्होंने उस सच्चे प्रेम, जुनून और भावनाओं की छोटी-छोटी बारीकियों को पकड़ने की कोशिश की, जो संवाद और भाव-भंगिमा के जरिए सामने आती हैं।" उन्होंने आगे कहा कि उन्हें और भंसाली दोनों को "एक साथ काम करके बहुत अच्छा लगा।"

भंसाली हर सीन का रखते थे ध्यान

माधुरी दीक्षित ने आगे बताया कि उन्हें और संजय लीला भंसाली को साथ काम करके बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि 'भंसाली हर सीन को बहुत बारीकी और मेहनत से तैयार करते हैं। खासकर मशहूर गाने 'काहे छेड़ छेड़ मोहे' की शूटिंग काफी मेहनत भरी थी।' माधुरी ने बताया कि 'उस गाने में उन्होंने जो घाघरा पहना था, वह बहुत भारी था। वह असली वेलवेट से बना था और उस पर असली कढ़ाई की गई थी। साथ ही उसमें असली मोती लगे थे, जिसकी वजह से उसका वजन और भी ज्यादा हो गया था।'

'काफी वजन था माधुरी का कॉस्ट्यूम'

माधुरी दीक्षित ने बताया कि, "उनका कॉस्ट्यूम इतना भारी था कि जब वह घूमना बंद कर देती थीं, तब भी घाघरा कुछ देर तक उनके चारों तरफ घूमता रहता था। शूटिंग के दौरान कई मुश्किलें आईं, लेकिन उन्हें लगता है कि उनकी सारी मेहनत सफल रही।" माधुरी के मुताबिक, जब फिल्म को पर्दे पर देखा जाता है और संजय लीला भंसाली की बारीकी, हर छोटे-बड़े पहलू पर ध्यान और सीन को फिल्माने का अंदाज नजर आता है, तब महसूस होता है कि की गई मेहनत पूरी तरह से सही और काबिल-ए-तारीफ थी।

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