फिल्म- मिर्जापुर द मूवी
फिल्म- मिर्जापुर द मूवी
कलाकार- पंकज त्रिपाठी , अली फजल , दिव्येंदु , जीतेंद्र , रवि किशन , रसिका दुग्गल , कुलभूषण खरबंदा और श्वेता त्रिपाठी
निर्देशक-गुरमीत सिंह
निर्माता-रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर
रेटिंग-3/5
Mirzapur The Movie Review: 'मिर्जापुर द मूवी' इस सीरीज की कहानी या कहें विरासत को आगे बढ़ाती है। इसमें दिखाई जाने वाली घटनाएं सीजन 1 के छठवें और सातवें एपिसोड से जुड़ी हैं। फिल्म का बड़े पर्दे पर आना एक्सेल एंटरटेनमेंट और अमेजन MGM की बनाई इस कामयाब सीरीज को बड़े पर्दे पर लाना था। फिल्म की कहानी बब्बन बाबूआ यादव (रवि किशन) के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो एक बिजनेस डील के बहाने कालीन भैया के करीब जाता है। लेकिन उसकी नजर उनकी गद्दी पर होती है।
फिल्म की कहानी
फिल्म के किरदार और कहानी का बेस सीरीज से मिलता जुलता हैं। बस इस बार विलेन बदल गया है। लेकिन मकसद एक ही है मिर्जापुर की गद्दी....। बब्बन बबुआ (रवि किशन) कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) और उनके बेटे मुन्ना (दिव्येंदु) को रास्ते से हटाकर मिर्जापुरी की गद्दी पर कब्जा करना चाहता है और मिर्जापुर का नया राजा बनना चाह रहा है। कालीन भैया तक पहुंचने के लिए वो सीएम के छोटे भाई जेपी यादव (प्रमोद पाठक) और जरीना (अनंग्शा बिस्वास) की मदद लेते हैं। बब्बन की लव लेडी भी है मुमताज बीबी यानी सोनल चौहान, जो उनके साथ परछाई सी रहती हैं। उसकी और बब्बन की सुरक्षा उनका वफादार बिरजू लोहार (मोहित मलिक) करता नजर आता है। अब बब्बन, मुन्ना (अली फजल) और बबलू (जीतेंद्र) के जरिए कालीन भैया तक पहुंच तो जाता है और डील भी कन्फर्म कर लेता है। लेकिन उसका प्लान कालीन भैया को मिर्जापुर से बाहर करके मारने का है, क्या वह सफल हो पाता है या नहीं ये फिल्म देखकर आपको पता चलेगा।
कलाकारों का अभिनय
रवि किशन फिल्म के धमाकेदार सरप्राइज पैकेज हैं। पूरी फिल्म में सबसे ज्यादा स्क्रीन टाइम रवि को ही मिला है। अपने किरदार में उन्होंने जान डाल दी है। चाहे एक्शन सीन हो या इमोशनल, वो हर फ्रेम में निखरे हैं। अखंडानंद त्रिपाठी उर्फ कालीन भैया के किरदार में पंकज त्रिपाठी का भौकाल कायम रहा है।
वहीं दिव्येंदु की मुन्ना के किरदार में बकैती दिल जीतने वाली है। बबलू बने जीतेंद्र ने विक्रांत मेसी की कमी महसूस नहीं होने दी है। इसके अलावा मोहित मलिक, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी, श्रिया पिलगांवकर, सुशांत सिंह और शीबा चड्ढा समेत सभी कलाकारों ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है।
कैसा रहा निर्देशन?
अब बात करते हैं निर्देशन की। थोड़ी सी हैरानी होती है कि जिस काम को गुरमीत सिंह ने सीरीज में इतना कमाल का किया था, वही काम फिल्म में सीरीज से हल्का कैसे पड़ गया है। फिल्म ना तो वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ के स्वरूप को पूरी तरह से धारण कर पाई है। ना अपनी बात को पूरी तरह से दिखाने में सफल हो पाई है। कई जगह आपको अधूरापन महसूस होगा। कई एक्टर्स काफी समय के लिए दिख रहे हैं, कई को टाइम जरूरत से भी कम दिया है। मोटामोटी बात करें तो सीरीज के मुकाबले फिल्म काफी हल्की है।
फिल्म में क्या अच्छा और क्या बुरा?
अच्छे की बात करें तो मुन्ना भैया की वापसी का फैंस को लंबे समय से इंतजार था, जो सफल रहा है। थिएटर में फिल्म की टाइटल थीम और बैकग्राउंड म्यूजिक दिल जीत लेता है। कुछ सीन छोड़कर क्लाइमैक्स शानदार है। वहीं बुरे की बात रें तो सीरीज के मुकाबले फिल्म उतनी मजेदार नहीं लगेगी। कही बहुत स्लो...तो कई भागमभाग। फिल्म में गानों की उतनी जरूरत नहीं लगती है....बेवजह फिल्म को गाने लंबा करते हैं।
देखें या नहीं?
अगर आप मिर्जापुरी सीरीज के फैन रहे हैं तो ये आपके लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है। नया एक्सपीरियंस है। अगर सीरीज ना भी देखी हो तो भी फिल्म का आनंद परिवार के साथ तो नहीं लेकिन दोस्त यारों के साथ उठा सकते हैं। बच्चों को अपने साथ भूलकर भी न ले जाएं।
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