Nusrat Fateh Ali Khan: 'मिर्जापुर द मूवी' से लेकर 'धुरंधर' तक, देखें बॉलीवुड का नुसरत फतेह अली खान के लिए ऑब्सेशन
Nusrat Fateh Ali Khan: हिंदी सिनेमा में कई शानदार सिंगर रहे हैं, जिनके गाने आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं। लेकिन बॉलीवुड का नुसरत फतेह अली खान के गानों के साथ ऑब्सेशन अलग ही लेवल का है। हाल में सुपरहिट हुईं फिल्मों में भी उस्ताद के कई गानों को शामिल किया गया, जो लोगों को बेहद पसंद आए।
साल 2026 की शुरुआत में रिलीज हुई आदित्य धर की सुपरहिट फिल्म 'धुरंधर 2' का गाना 'जान से गुजरते हैं' ने भी खूब धूम मचाई है।
Nusrat Fateh Ali Khan: 'शहंशाह-ए-कव्वाली' का खिताब उस्ताद नुसरत फतेह अली खान जैसे शानदार कलाकार के लिए बिल्कुल सही है। आज के दौर में जब हर तरफ रीमिक्स और बेतुके बोल वाले गाने सुनने को मिलते हैं। लेकिन नुसरत फतेह अली खान एक चमकते हुए सितारे की तरह हैं। उनकी जबरदस्त आवाज और नए एक्सपेरिमेंट करने की सोच ने सूफी संगीत की सदियों पुरानी परंपरा - कव्वाली - को पाकिस्तान के छोटे-छोटे गांवों से लेकर पश्चिमी देशों के बड़े-बड़े म्यूजिक फेस्टिवल और इंटरनेशनल स्टेज तक पहुंचाया।
नुसरत साहब के सदाबहार गानों ने कई पीढ़ियों को अपना दीवाना बनाया है। आज भी उनके गाने मशहूर फिल्मों में नए अंदाज में पेश किए जाते हैं या उनके कुछ हिस्सों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे वे फिर से हमारे बीच चर्चा का विषय बन जाते हैं। या यूं कहें कि उनकी क्रिएशन किसी भी सीन को और भी यादगार बना देती हैं।
नुसरत फतेह अली खान के गाने का हालिया जादू
हाल ही में तब जादू देखने को मिला जब उनके गाने 'सांसों की माला' ने 'मिर्जापुर द फिल्म' में एक अलग ही जोश भर दिया। यह आपको फिल्म देखने पर पता चलेगा - यहां कोई स्पॉइलर नहीं दिया जा रहा है। नुसरत फतेह अली खान की ओरिजिनल आवाज को गायक मधुर शर्मा और वैभव पानी की नई गायकी के साथ बहुत खूबसूरती से मिलाया गया है। यह गाना 'मिड-क्रेडिट सीक्वेंस' में एक अहम भूमिका निभाता है, जिसमें बीना त्रिपाठी (रसिका दुगल) और उनके अतीत का एक पन्ना दिखाया गया है।
इससे दर्शकों को यह भी याद आ सकता है कि यह धुन पहले 90 के दशक की मशहूर फिल्मों जैसे 'जीत' (1996) और 'कोयला' (1997) में सुनी गई थी, जिनमें माधुरी दीक्षित और शाहरुख खान ने काम किया था। यह कोई पहली फिल्म नहीं है जिसमें ऐसा हुआ हो।
साल 2026 की शुरुआत में रिलीज हुई आदित्य धर की सुपरहिट फिल्म 'धुरंधर 2' का गाना 'जान से गुजरते हैं' ने भी खूब धूम मचाई है। ये भी नुसरत फतेह अली खान की ही एक और कव्वाली है। इसे 1977 के क्लासिक गाने 'दिल पे जख्म खाते हैं' से लिया गया है। इस नए वर्जन को शाश्वत सचदेव ने नए अंदाज में तैयार किया था और इसमें खान साहब और शाश्वत सचदेव की आवाजें थीं।
यह गाना आदित्य धर की उस जबरदस्त कहानी में कितनी अच्छी तरह फिट बैठा, जो हिंदी सिनेमा की अब तक की सबसे धमाकेदार ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक बन गई है। प्यार, धोखे और अटूट जज्जबाती मजबूती की बात करें तो नुसरत फतेह अली खान की कव्वाली ने उस तनाव को और बढ़ा दिया जो 'धुरंधर' की मुख्य थीम थी।
इन दो फिल्मों से पहले भी कई बार नुसरत फतेह अली खान के गाने बॉलीवुड में हो चुके हैं यूज
हालिया गानों ने हमें पुरानी यादों में खोने और उनके कुछ ऐसे सदाबहार गानों को याद करने का मौका दिया, जिन्होंने पिछली और मौजूदा पीढ़ियों के म्यूजिक कलेक्शन और स्पॉटिफाई लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। उनके सबसे बेहतरीन क्लासिक गानों में से एक था 'मेरे रश्के कमर', जिसे नुसरत ने ही कंपोज किया और गाया था और इसके बोल फना बुलंदशहरी ने लिखे थे।
यह गजल-कव्वाली आज भी कॉन्सर्ट में लोगों की पसंदीदा है। इसका असर ही कुछ अलग होता है। इसकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि 2017 की फिल्म 'बादशाहो' के लिए तनिष्क बागची ने इसे नए अंदाज में तैयार किया और राहत फतेह अली खान ने इसे अपनी आवाज दी।
सूफी संगीत की पहचान उस रोमैंटिक अंदाज से और मजबूत होती है, जिसे सदियों से कई सिंगर्स ने अपनाया है। नुसरत फतेह अली खान ने अपनी अब तक की सबसे रोमैंटिक गजलों में से एक - 'ये जो हल्का-हल्का सुरूर है' - में इस अंदाज को बनाए रखा। बाद में इसे कई बॉलीवुड गानों के मिक्स (मेडले) में इस्तेमाल किया गया, जैसे 2016 के गाने 'हल्का-हल्का' में और फिर 2018 की फिल्म 'फन्ने खान' में भी इसे कुछ बदलावों के साथ शामिल किया गया, जिसमें इसके नशे जैसे धुन वाले बीट्स को बरकरार रखा गया।
इस लिस्ट में रणवीर सिंह और सारा अली खान की फिल्म 'सिम्बा' का गाना 'तेरे बिन नहीं लगदा' शामिल है। इस फिल्म के लिए 'तेरे बिन' गाने में उस सूफी गीत को शामिल किया गया, जिसे उनके भतीजे राहत फतेह अली खान और असीस कौर ने मिलकर गाया था।
'सानू इक पल चैन ना आवे' गाना 2018 की फिल्म 'रेड' के नए मॉडर्न वर्जन में शामिल किया गया था। उसी फिल्म का एक और गाना था 'नित खैर मंगा' - यह एक प्रेयर सॉन्ग था, जिसे हल्के म्यूजिक (अकॉस्टिक) वाले बॉलीवुड स्टाइल में ढाला गया और राहत फतेह अली खान ने इसे फिर से गाया। उस्ताद के लिखे और गाए गए गाने 'किन्ना सोहना तेनू रब ने बनाया' को आमिर खान और करिश्मा कपूर की फिल्म 'राजा हिंदुस्तानी' (1996) और 'मरजावां' (2019) में इस्तेमाल किया गया।
8वीं सदी के पंजाबी सूफी सिंगर बाबा बुल्ले शाह द्वारा लिखा गया गाना 'मेरा पिया घर आया' नुसरत फतेह अली खान की वजह से बहुत मशहूर हुआ था। इसे 1995 की फिल्म 'याराना' के लिए फिर से बनाया गया, जिसमें अनु मलिक ने कमर्शियल जैज़ का तड़का लगाया और कविता कृष्णमूर्ति ने इसे गाया। यह माधुरी दीक्षित के लिए एक यादगार डांस गाना बन गया।
हर पीढ़ी के लिए नुसरत फतेह अली खान का कोई न कोई गाना मौजूद रहा है। हर उम्र के लोगों को उस्ताद की कोई न कोई कव्वाली पसंद आती है, जिसमें मॉडर्न बीट और टेम्पो का मेल होता है - और यह कभी निराश नहीं करती।