Cinema Ka Flashback: मल्टीप्लेक्स के जमाने में सिनेमाघरों में फिल्म देखना काफी आसान हो गया है। लेकिन 70-80 के दशक में किसी फिल्म की टिकट हफ्ते-दस दिन तक लोगों को मिल ही नहीं पाती थी। सिनेमाघरों में हर वक्त दर्शकों का मेला लगा रहता था। कुछ ऐसा ही हुआ था मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म के साथ। 15 दिनों तक सिनेमाघरों में लोगों की भीड़ फिल्म देखने के लिए जमा रही है। फिल्म के टिकट कम पड़ने लगे थे। इस फिल्म में तीन सुपरस्टार की स्टार पावर ने उस फिल्म को बेहद यादगार और सफल बना दिया था।
1988 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई 'जीते हैं शान से' आज भी बॉलीवुड की मल्टी-स्टारर क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में तीन सुपरस्टार संजय दत्त, गोविंदा के साथ मिथुन चक्रवर्ती दिखे थे। तीनों ने साथ में पहली बार स्क्रीन शेयर की थी। वहीं लीडिंग लेडी की बात करें तो इसमें मंदाकिनी, विजेता पंडित थी। वहीं विलेन में डैनी डेंजोंगपा।
फिल्म की कहानी तीन जिगरी यार की है। ये दोस्त हर गरीब की मदद करने के लिए हर हद गुजरने को तैयार रहते हैं। लेकिन कुछ गलतफहमियों और बदमाशों की गंदी साजिश की वजह से उनके बीच झगड़ा हो जाता है। आखिर में दोस्ती और न्याय को जीत मिलती है। फिल्म में एक्शन, ड्रामा, इमोशन और गाने सब बेहद शानदार है। आज भी गाना 'जुली जुली जुली... जॉनी का दिल तुम पर आया जुली' का क्रेज लोगों के सिर चड़कर बोलता है।
फिल्म ने इतना किया था कलेक्शन
फिल्म को सिर्फ 2 करोड़ रुपये में तैयार किया गया था। लेकिन इसने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 8 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी। रिलीज के समय यह सुपर-डुपर हिट रही थी। मुंबई के हर बड़े सिनेमाघरों में फिल्म 15 दिनों तक हाउसफुल रही। टिकट के लिए लोग लंबी कतारों में खड़े घंटो इंतजार करते थे।
70-80 के दशक में मल्टीप्लेक्स या ओटीटी का दौर नहीं था। सिनेमाहॉल ही मनोरंजन का जरिया हुआ करता था। तीन बड़े सितारों का कॉम्बिनेशन दर्शकों को थिएटर तक खींच लाने में कामयाब रहे थे। प्रोड्यूसर्स ने इस फिल्म से ताबड़तोड़ कमाई की थी।