Nana Patekar Death: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अपनी दमदार एक्टिंग के साथ-साथ अपनी सादगी के लिए भी जाने जाते थे। फिल्म इंडस्ट्री में दशकों तक काम करने के बावजूद उन्होंने खुद को मुंबई की चकाचौंध और लग्जरी लाइफ से दूर रखा। उनके पास शोहरत थी, पैसा था और मुंबई जैसी मायानगरी में रहने का मौका था। लेकिन उनका मन गांव में ही रमता था। यहां तक कि उनके घर में एयर कंडीशनर (AC) तक नहीं था। इसका एक दिलचस्प किस्सा उन्होंने अमिताभ बच्चन के शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में सुनाया था।
नाना पाटेकर असल जिंदगी में बेहद साधारण तरीके से रहना पसंद करते थे। KBC में बातचीत के दौरान नाना पाटेकर ने अपनी जिंदगी के इस पहलू का खुलासा किया था। बिग बी ने जब उनसे पूछा कि इतनी कामयाबी के बाद वह गांव में क्यों रहना पसंद करते हैं, तो नाना ने कहा कि वह फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हैं। वह सिर्फ काम के लिए मुंबई आते हैं और फिर वापस चले जाते हैं। नाना ने कहा था कि वह गांव के रहने वाले हैं और वहीं रहना पसंद करते हैं। शहर की पार्टियां और वहां की जिंदगी उन्हें खास पसंद नहीं आती।
इसके बाद नाना ने AC को लेकर जो बात कही, वह उनकी पूरी जीवनशैली को बयां कर देती है। उन्होंने कहा था कि उनके पास AC नहीं है, क्योंकि उन्हें उसकी जरूरत नहीं लगती। उनके मुताबिक शहर में घरों के चारों तरफ दीवारें होती हैं। लेकिन उनके घर के चारों तरफ पहाड़ हैं। यानी जहां दूसरे लोग घर को ठंडा रखने के लिए AC और दूसरी सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं, वहीं नाना पाटेकर के लिए प्रकृति ही उनका सुकून थी।
उनका मानना था कि जरूरतें जितनी सीमित हों, जिंदगी उतनी आसान हो जाती है। शायद यही वजह थी कि फिल्म इंडस्ट्री की चमक-दमक के बीच भी नाना ने अपनी जिंदगी को गांव की मिट्टी और पहाड़ों के करीब रखना चुना। नाना पाटेकर के लिए AC या आलीशान सुविधाएं कमी नहीं थीं। उनके लिए असली लग्जरी थी खुली हवा, पहाड़, गांव की जिंदगी और मन का सुकून। यही वजह है कि करोड़ों की शोहरत हासिल करने के बाद भी उनका दिल शहर की चमक-दमक में नहीं, बल्कि गांव की सादगी में बसता था।
'जितना हमने चाहा ना उससे कई गुना ज्यादा मिल गया…'
नाना पाटेकर ने वायरल वीडियो में (KBC के क्लिप में) अमिताभ बच्चन से कहते हैं, "मैं इंडस्ट्री का हूं नहीं। मैं यहां आता हूं, काम करता हूं, वापस भाग जाता हूं। मैं यहां पार्टी में गया नहीं। मुझे वहां वो रास नहीं आता। मैं गांव-खेड़े का हूं और वहीं का रहूंगा, वहीं अच्छा लगता है। जितना हमने चाहा उससे कई गुना मिल गया अमित जी। जरूरतें सीमित हो ना तो बहुत आसान हो जाता है। AC है नहीं, बड़ा मजा आता है। शहर में जैसे दीवारें होती हैं ना, हमारे यहां पहाड़ हैं। इस तरफ पहाड़, इस तरफ पहाड़…।"