Daadi Ki Shaadi Review: कूल दादी की ड्रामे वाली मजेदार शादी..., नीतू कपूर-कपिल शर्मा की फिल्म ने जीता दिल

Daadi Ki Shaadi Review: कॉमेडी ड्रामा 'दादी की शादी' आज सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। फिल्म में कपिल शर्मा, नीतू कपूर समेत कई दिग्गज सितारे नजर आने वाले हैं। तो कैसी है फिल्म चलिए आपको बताते हैं।

अपडेटेड May 08, 2026 पर 11:46 AM
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फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट है। बतौर एक्टर नीतू कपूर, पूरी फिल्म की आत्मा हैं। उनका स्क्रीन प्रेजेंस बेहद नैचुरल और दिल छू लेने वाला है।

फिल्म- दादी की शादी

निर्देशक- आशीष आर मोहन

कलाकार- नीतू कपूर, कपिल शर्मा, आर सरथ कुमार, सादिया खतीब, रिद्धिमा कपूर और योगराज सिंह

रेटिंग- 3.5 स्टार्स

Daadi Ki Shaadi Review: आज के दौर में जहां ज्यादातर फिल्में एक्शन, थ्रिल और बड़े-बड़े विजुअल्स पर निर्भर नजर आती हैं, वहीं 'दादी की शादी' एक सुकून भरी फैमिली ड्रामा बनकर सामने आती है, जो रिश्तों, भावनाओं और परिवार की अहमियत को बेहद खूबसूरती से पेश करती है। निर्देशक ने इस कहानी को हल्के-फुल्के हास्य और इमोशनल पलों के साथ इस तरह सजाया है कि फिल्म शुरुआत से अंत तक दर्शकों को बांधे रखती है।


फिल्म की स्टोरी टोनी कालरा यानी कपिल शर्मा और कन्नू आहूजा यानी सादिया खतीब के सगाई से शुरू होती है। ढोल नगाड़े...नाच गाना... भांगड़ा और परिवार में खुशी का माहौल दिखाई देता है। लेकिन यह खुशी एक बड़े सदमें में तब बदल जाती है जब कन्नू की दादी विमला आहूजा उर्फ नीतू कपूर अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला करती हैं। वह परिवार को बताती हैं कि वे शादी करने वाली हैं। विमला का फैसला सिर्फ शादी का ऐलान नहीं है, बल्कि समाज की उस सोच पर करारा चमाचा है, जो मानती हैं कि एक उम्र के बाद, इंसान को सिर्फ भक्ति का रास्ता अपनाना चाहिए। फिल्म का पहला हाफ हल्का-फुल्का है। दादी के फैसले से परिवार का ‘कल्चरल शॉक’ दिखाया जाता है। वहीं दूसरा हाफ इमोशनस से भरा है। कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट है...वह क्या है ये आपको सिनेमाघरों में देखने जाना होगा।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट है। बतौर एक्टर नीतू कपूर, पूरी फिल्म की आत्मा हैं। उनका स्क्रीन प्रेजेंस बेहद नैचुरल और दिल छू लेने वाला है। दादी के किरदार में उन्होंने गर्मजोशी, शरारत और इमोशन का शानदार संतुलन बनाया है। वहीं कपिल शर्मा भी अपने चिर-परिचित अंदाज में दर्शकों को हंसाने में सफल रहते हैं, लेकिन इस बार उनके किरदार में सिर्फ कॉमेडी ही नहीं, इमोशनल डेप्थ भी देखने को मिलती है। फिल्म में आर सरथ कुमार का अंदाज देखते ही बनता है और सादिया खतीब भी अपने किरदार के साथ पूरा इंसाफ करती हैं। हालांकि रिद्धिमा कपूर बेहतर हो सकती थीं लेकिन डेब्यू के तौर पर उनका भी काम ठीक है।

वहीं योगराज सिंह तेजू कोल्हापुरे, दीपक के. दत्ता, हुड्डा जितेंद्र, अदिति मित्तल, निखत हेगड़े, विधान एस शर्मा, स्वर्णा पांडे, ईशान चड्ढा, चंपा फ्लोरा डेविड जैकब, परवीन एच, मोहम्मद अली, राहुल सिंह सहित बाकी एक्टर्स ने भी अपनी भूमिकाओं को ईमानदारी से निभाया है। खास बात यह है कि फिल्म हर किरदार को अपनी जगह और अहमियत देती है, जिससे कहानी ज्यादा रियल और रिलेटेबल लगती है।

फिल्म का फर्स्ट हाफ हल्का-फुल्का और मनोरंजक है, जिसमें फैमिली मोमेंट्स और कॉमिक सिचुएशन्स खूब एंटरटेन करती हैं। सेकेंड हाफ में कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है और कई सीन ऐसे आते हैं जो आंखें नम कर देते हैं। हालांकि, 2 घंटे 35 मिनट की लंबाई कुछ जगह महसूस होती है और कुछ सीन्स थोड़े छोटे किए जा सकते थे। संगीत और बैकग्राउंड स्कोर कहानी के मूड को खूबसूरती से सपोर्ट करते हैं। फिल्म का सबसे अच्छा पहलू यह है कि यह बिना ज्यादा ड्रामा या ओवर-द-टॉप मोमेंट्स के, बेहद सिंपल तरीके से दिल जीत लेती है।

कुल मिलाकर, एक ऐसी फिल्म है जिसे पूरे परिवार के साथ बैठकर एन्जॉय किया जा सकता है। इसमें हंसी है, इमोशन है और रिश्तों की मिठास भी। अगर आप हल्की-फुल्की लेकिन दिल से बनी फैमिली फिल्मों के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपको जरूर पसंद आएगी।

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