Valentines Day: सीजन ऑफ लव में जरूर देखें ये रियल लाइफ लव स्टोरीज वाली मूवीज, हीर-रांझा से लेकर रोमियो-जूलियट तक जानिए कैसे किया प्यार का इजहार

Valentines Day Bollywood Special: वैलेंटाइन वीक का मौसम आते ही हर ओर प्यार और रोमांस का रंग छा जाता है। हिंदी सिनेमा ने हमेशा से प्रेम कहानियों को अपनी फिल्मों का अहम हिस्सा बनाया है। कई बार ये कहानियां लोककथाओं और साहित्य से प्रेरित रही हैं, तो कभी ऐतिहासिक प्रेम गाथाओं से।

अपडेटेड Feb 13, 2026 पर 10:20 PM
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वैलेंटाइन वीक में प्यार की मिठास घुल रही है, लेकिन सच्चा इश्क हमेशा आसान नहीं होता। लोककथाओं की वे अमर प्रेम कहानियां जिनमें दुनिया ने आशिकों को अलग करने की हर साजिश रची, फिर भी उनका प्यार आज भी दिलों में बस्ता है। बॉलीवुड ने हीर-रांझा, लैला-मजनू, सोहनी-महीवाल और रोमियो-जूलियट जैसे क्लासिक्स को सिल्वर स्क्रीन पर उतारकर नई जिंदगी दी। वो पहला नजराना, वो बिछड़ने का दर्द, वो चिता पर एक होने का जज्बा ये फिल्में वैलेंटाइन पर याद दिलाती हैं कि सच्चा प्यार बेमिसाल बलिदान मांगता है। आइए, इस प्रेमोत्सव पर इनकी यात्रा को फिर से जीएं।

हीर-रांझा

पंजाब की धरती पर जन्मी हीर-रांझा की कहानी वारीस शाह के कलम से अमर हुई। रांझा बांसुरी बजाता किसान, हीर अमीर जमींदार की बेटी उनका प्यार समाज की दीवारें तोड़ता है, लेकिन चाचा कैडो की चालाकी से हीर की शादी सैदा खेहरा से हो जाती। रांझा जोगी बन अंत में चिता पर साथ जलते हैं। बॉलीवुड ने 1970 में चेतन आनंद की 'हीर रांझा' में राज कुमार और प्रिया राजवंश को उतारा। पूरी फिल्म शायरी में बुनी गई, कैफी आजमी के बोल और मदन मोहन का संगीत आज भी रुला देता। 1992 में हरमेश मल्होत्रा ने अनिल कपूर-सुष्मिता सेन संग रीमेक बनाया। वैलेंटाइन पर ये फिल्म सिखाती—प्यार में जाति-धर्म रुकावट नहीं।

लैला-मजनू

फारसी लोककथा से निकली लैला-मजनू की मोहब्बत ने सदियों लांघी है। मजनू लैला के नाम का दीवाना हो गया, जंगल में भटकता रहा। बॉलीवुड ने इसे 1976 में ए.आर. बलराव ने संजय खान-रानी चोपड़ा के साथ दिखाया, नसीर हुसैन ने 2018 में इम्तियाज अली स्टाइल में अविनाश तिवारी-तृप्ति डिमरी को चुना। गुलजार के बोल, 'नीलाश' वाला सीन आज भी कांप देता। वैलेंटाइन वीक में ये याद दिलाता है कि सच्चा प्रेम दीवानगी है, जो बिना मिले भी पूरा हो।


सोहनी-महीवाल

सोहनी की मिट्टी के घड़े से तैरकर महीवाल से मिलने की कहानी हृदयविदारक है। महीवाल मछुआरा बन इंतजार करता, लेकिन सोहनी के ससुराल वाले घड़ा फोड़ देते। आखिर सोहनी डूब जाती। 1955 में नजरुल बसर ने राज कपूर-नीलम को लिया, 1984 में कमाल अमरोही ने जरीना वहाब-शत्रुघ्न सिन्हा को। गुलाम हैदर का संगीत चेनाब की लहरों सा बहे। यह वैलेंटाइन पर सिखाता है प्यार बाधाओं को तोड़ता है, भले पानी में डूब जाए।

रोमियो-जूलियट

शेक्सपियर की ट्रेजडी ने बॉलीवुड को प्रेरित किया। 1961 में 'बॉबी' में ऋषि कपूर-डिम्पल कपाड़िया ने जवानी का जुनून दिखाया। 1981-82 में कमल हासन की 'एक दुजे के लिए' और 'सनम तेरी कसम' ने दक्षिणी मसाले डाले। 1988 की 'कयामत से कयामत तक' आमिर-जूही ने ब्लॉकबस्टर बनाया। 2012 की 'इशकजादे' परिणीति-अर्जुन, 2013 की 'रामलीला' रणवीर-दीपिका ने आग लगाई।

अनारकली-सलीम

1960 की फिल्म मुगल-ए-आजम में दिलिप कुमार और मधुबाला ने सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी को अमर बना दिया। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी रोमांटिक क्लासिक मानी जाती है और आज भी वैलेंटाइन वीक पर याद की जाती है।

ये कहानियां वैलेंटाइन वीक को खास बनाती हैं। रोज डे पर नजराना, प्रपोज डे पर इकरार, फिर ट्रेजेडी में बलिदान। बॉलीवुड ने इन्हें गीतों से सजाया, ताकि हम प्यार की गहराई समझ सकें। आज जब दुनिया स्वाइप करती है, ये याद दिलाते है कि सच्चा इश्क अमर है।

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