Peddi Movie Review: 'पेड्डी' में राम चरण की धांसू परफॉमेंस, जान्हवी कपूर के संग छाई जोड़ी

Peddi Movie Review: राम चरण-जान्हवी कपूर स्टारर 'पेड्डी' सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। फिल्म देखने का अलग आप प्लान बना रहे हैं तो एक बार इस रिव्यू को जरूर पढ़ें...

अपडेटेड Jun 04, 2026 पर 12:37 PM
फिल्म का लंबे समय से इंतजार हो रहा था। इससे फैंस की काफी उम्मीदें जुड़ी थीं और इसकी रिलीज कई बार टाली भी गई थी।

फिल्म-पेड्डी

कलाकार- राम चरण, जान्हवी कपूर, दिव्येंदु, रवि किशन, उपेंद्र लिमये

निर्देशक- बुच्ची बाबू सना


रेटिंग-3.5

Peddi Movie Review: राम चरण की 'पेड्डी' फाइनली रिलीज हो चुकी है। फिल्म का लंबे समय से इंतजार हो रहा था। इससे फैंस की काफी उम्मीदें जुड़ी थीं और इसकी रिलीज कई बार टाली भी गई थी। यह फिल्म राम चरण के लिए आरआरआर के बाद एक एग्जाम की तरह थी। वहीं निर्देशक बुची बाबू सना की दूसरी खास फिल्म थी। यह फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बेहद जरूरी थिएटर रिलीज में से एक बनी हुई थी।

कहानी

यह कहानी एक गांव से शुरू होती है, जो पहचान और बुनियादी सुविधाओं के लिए सालों से परेशानी झेल रहा है। कहानी एक ऐसे समुदाय के सपने के बारे में है, जो एक रेलवे स्टेशन चाहता है, जिससे उसका भविष्य बदल सकता है। इस संघर्ष के केंद्र में पेड्डी यानी राम चरण है, एक यंग मेन, जिसके निजी सपने धीरे-धीरे पूरे गांव के सपनों से जुड़ते हैं। फिल्म में खेल, एक्शन और व्यावसायिक चीजें मौजूद हैं, लेकिन इमोशन सबसे पावरफुल है। बुची बाबू सना एक बार फिर वहीं इमोशनली ताकत दिखाई है, जिसने उनकी उप्पेना को यादगार बनाया था। राम चरण किरदार में पूरी तरह ढल जाते हैं, चाहे वह उनकी बॉडी लैग्वेज हो, ट्रांफॉर्मेशन हो या इमोशनल वीकनेस। वे सहजता से मासूमियत से लेकर गुस्से तक, दृढ़ संकल्प से लेकर दिल टूटने तक के एक्सप्रेशन बखूबी पेश कर पाए हैं।कई सीन शानदार हैं तो कई कमजोर भी हैं।

एक्टिंग

एक्टिंग की बात करें तो राम चरण ने शानदार काम किया है। उनका हर एक्सप्रेशन आपको ताली बजाने पर मजबूर कर देता है। जान्हवी कपूर का किरदार भी अच्छा है, लेकिन और भी अच्छा हो सकता था। एक्ट्रेस को फिल्म में एक शोके की तरह पेश किया गया है। उनके किरदार की बहुत जरूरत महसूस होती नहीं है, क्योंकि कहानी का सारा फोकस पेड्डी पर रहता है। दिव्येंदु, रवि किशन, उपेंद्र लिमये अपने किरदार को पूरी ईमानदारी के साथ पेश किया है।

निर्देशन

फिल्म में इमोशन को लगातार बनाए रखने के लिए निर्देशक बुची बाबू सना तारीफ काबिल हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि कैरेक्टर कहानी के केंद्र में रहें। फिल्म की लोकेशन से लेकर खूबसूरत सीन आपका दिल जीतेंगे। वहीं एक्शन...स्ट्रगल भरे सीन आपको जुड़ाव महसूस कराएंगे। कही-कही फिल्म कमजोर भी होती है।

म्यूजिक

एआर रहमान का म्यूजिक भी फिल्म के लिए एक बड़ा सपोर्ट सिस्टम है। गाने कहानी में खूबसूरती से पिरोए गए हैं, जबकि बैकग्राउंड म्यूजिक खास और जरूरी सीन्स को और भी दमदार बनाता है। रहमान का म्यूजिक फिल्म में एक इमोशनल टच देता है, जो सीन के खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक मन में बनी रहती है।

फिल्म देखें या नहीं

फिल्म में कुछ कमियां भी हैं। जाह्नवी कपूर का किरदार सबसे बड़ी कमजोर कड़ी है। एडिटिंग और भी शानदार हो सकती थी। तीन घंटे से अधिक लंबी यह फिल्म थोड़ा सा बोर भी करती है। लेकिन कहीं-कहीं आपका दिल जीत लेती है। पेड्डी पूरी तरह से परफेक्ट नहीं है, लेकिन यह दर्शकों को कहानी से जोड़ने में कामयाब रहती है।

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